सरायकेला गुंडिचा मंदिर में विपद तारिणी पूजा में उमड़ा सुहागन महिलाओं का जनसैलाब परिवार की सुख शांति के लिए पूजा की
सरायकेला गुंडिचा मंदिर मौसी बाड़ी में को मां विपदतारणी की पूजा धूमधाम से की गई। हजारों की संख्या में सुहागिन महिलाएं स्नान कर नए वस्त्र पहन मंदिरों में पहुंचीं। विधि व्यवस्था के लिए प्रशासन और मेला कमेटी मुख्यधिति महिलाओं ने 13 प्रकार के फल-फूल और मिठाई माता को अर्पित किए।


मां विपदतारणी को मां दुर्गा का एक रूप माना जाता है संकटों और विपदाओं से मुक्ति पाने के लिए मनाया जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से माताओं द्वारा अपने परिवार की सुरक्षा और कल्याण के लिए किया जाता है। इस व्रत में, भक्त देवी विपदतारिणी की पूजा करते हैं और उनसे अपने और अपने परिवार के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
सरायकेला गुंडिचा मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ी। पुरोहित सानो आचार्य जी ने बताया कि यह पूजा परिवार से संकट दूर करने के लिए की जाती है। मां विपदतारणी को मां दुर्गा का एक रूप माना जाता है।

गुडिचा मंदिर में पुरोहित ब्रह्मानंद महापात्र सानो आचार्य एवं अन्यो ने विधि-विधान से पूजा कराई। महिलाओं ने दूर्वा घास से रक्षा सूत्र बनाकर परिवार के सदस्यों के हाथों में बांधा। मान्यता है कि यह रक्षा सूत्र हर प्रकार की विपत्ति से बचाता है।
यह पूजा हर साल रथयात्रा के बाद मंगलवार को की जाती है। पूजा के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाया और प्रसाद लेकर अपने घर गईं। सुबह से ही बाजारों में पूजा सामग्री और फलों की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ देखी गई। मौके में मेला कमेटी के अध्यक्ष मनोज चौधरी छोटेलाल साहू गोविंद साहू विकास प्रजापति अमित रथ के काफी संख्या में सदस्य मौजूद थे

