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हरिभंजा में श्री जगन्नाथ रथ यात्रा सउल्लास संपन्न, चतुर्था मूर्ति को चढ़ाया गया छप्पन भोग, निभायी गयी अधरपणा की रश्म 

 

हरिभंजा समेत क्षेत्र के विभिन्न स्थानों में प्रभु जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्र धूम धाम से संपन्न हो गयी. पुरोहितों द्वारा चतुर्था मूर्ति (प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा व सुदर्शन) को रथ पर आरुढ़ कराया गया. इसके पश्चात बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष को खींच कर गुंडिचा मंदिर से श्रीमंदिर तक पहुंचाया. मौके पर भक्तों में प्रसाद का वितरण किया गया. हरिभंजा के गुंडिचा मंदिर में भक्तों के लिये भंडारा का आयोजन कर प्रसाद का भी वितरण किया गया. बाहुड़ा यात्र पर प्रभु जगन्नाथ का भव्य श्रंगार किया गया. श्रीमंदिर पहुंचने पर चतुर्था मूर्ति की आरती उतारी गयी तथा भोग लगाया गया. भक्तों में प्रसाद का वितरण किया गया. हरिभंजा में रथ से भक्तों के बीच प्रसाद के रुप में कंटहल फेंका गया. बाहुड़ा यात्र के साथ आस्था, मान्यता व परंपराओं का त्योहार रथ यात्र का समापन हो गया. अब श्रीमंदिर में ही अगले एक साल पर प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा की पूजा अर्चना नीति नियम के साथ की जायेगी. हरिभंजा में रथ यात्रा के दौरान विद्या विनोद सिंहदेव, संजय सिंहदेव, राजेश सिंहदेव, पृथ्वीराज सिंहदेव आदि उपस्थित थे. इस दौरान सभी धार्मिक रश्मों को मंदिर के मुख्य पुरोहित पं प्रदीप कुमार दाश व भरत मिश्रा ने संपन्न कराया. हरिभंजा में रथ पर महाप्रभु की आरती उतारने के साथ साथ अधरपणा व छप्पन भोग के रश्म को पूरा किया गया. रथ पर ही महाप्रभु को छप्पन भोग का प्रसाद चढ़ाया गया. रथ में पुरोहितों द्वारा 56 प्रकार के मिष्टान्न भोग चढ़ाया गया. इसके अलावे अधरपणा नीति को भी पूरा किया गया.

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