कोल्हान की शेरनी: बेबी महतो की जीवनी, संघर्ष, और उभरती राजनीतिक पहचान
झारखंड की सामाजिक और राजनीतिक जमीन पर एक नाम लगातार चर्चा में बना हुआ है — बेबी महतो, जिन्हें आज पूरे राज्य में “कोल्हान शेरनी” के नाम से जाना जाता है। उनकी आवाज़ अब केवल कोल्हान तक सीमित नहीं, बल्कि झारखंड के हर जिले, हर गाँव और हर जनसभा तक पहुँच चुकी है। वे झारखंड लोकतांत्रिक मोर्चा (JLKM) की महिला मोर्चा की केंद्रीय सचिव हैं और अपने काम, सोच और संघर्ष के लिए जनमानस में विशेष स्थान रखती हैं।


बेबी महतो का जन्म सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड स्थित लक्ष्मीपोसी गांव में हुआ। एक संयुक्त और सादा परिवार में पली-बढ़ी बेबी महतो की परवरिश ने उन्हें सामूहिकता, संघर्ष और ज़मीनी जुड़ाव की भावना दी। उनके पिताजी झारखंड आंदोलन में सक्रिय कार्यकर्ता रहे, जो शहीद निर्मल महतो के साथ आंदोलन में भाग लेते थे। वे स्कूल जाने के बहाने घर से निकलते और आंदोलन में शामिल होते थे। दुर्भाग्यवश उनका अचानक निधन बहुत ही कम उम्र में हो गया, लेकिन उनकी विचारधारा आज भी बेटी बेबी महतो के जीवन और नेतृत्व का आधार बनी हुई है।
उनके परिवार में माँ, चाचा-चाची, दो बहनें और एक भाई हैं। संयुक्त परिवार की भावना ने उन्हें हमेशा सबको साथ लेकर चलने की सीख दी है। यही कारण है कि वे आज भी जमीनी राजनीति में विश्वास रखती हैं और आम जनता के सुख-दुख में बराबर की भागीदार बनती हैं।
डुमरी विधायक टाइगर जयराम महतो को वे अपना राजनीतिक गुरु और आदर्श मानती हैं। उनका कहना है कि जिस साहस, प्रतिबद्धता और जनसंघर्ष के प्रतीक के रूप में जयराम महतो को जाना जाता है, वही प्रेरणा उन्हें भी जनता की सेवा और अधिकारों की लड़ाई के लिए निरंतर संघर्ष करने की शक्ति देती है।
बेबी महतो की राजनीतिक यात्रा सिर्फ संगठनों और आंदोलनों तक सीमित नहीं रही है। उन्होंने पूरे झारखंड में अब तक 100 से भी अधिक सार्वजनिक मंचों पर भाषण दिए हैं, जिनमें महिलाओं के हक, भाषा, पहचान, स्थानीय स्वराज और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर खुलकर बात की है। उनकी भाषण शैली स्पष्ट, निडर और प्रभावशाली है — जो सीधे आम जनता के दिल तक जाती है।
उनकी लोकप्रियता अचानक नहीं आई। जब राजधानी रांची में भाषा आंदोलन चल रहा था, उस दौरान बेबी महतो और पूजा महतो का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसने पूरे झारखंड में हलचल मचा दी। उस वीडियो के बाद बेबी महतो एक आम नाम से उठकर, एक जन-जन की आवाज़ बन गईं। झारखंड के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर वह नाम ट्रेंड करने लगा, जो आज हज़ारों की उम्मीद बन चुकी है।
बेबी महतो केवल मैदानों में ही नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी एक सशक्त आंदोलनकारी हैं। उनका यूट्यूब चैनल, जिस पर 3.5 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं, झारखंड के मुद्दों को राष्ट्रव्यापी प्लेटफॉर्म पर पहुंचा रहा है। उन्हें YouTube की ओर से सिल्वर प्ले बटन भी मिल चुका है, जो उनके मेहनत और जनसंपर्क की डिजिटल सफलता का प्रमाण है। उनके वीडियो सामाजिक जागरूकता, महिला नेतृत्व और स्थानीय अस्मिता से जुड़े मुद्दों पर आधारित होते हैं।
हाल ही में उन्होंने अपना जन्मदिन अनाथ बच्चों के साथ मनाकर यह दिखाया कि राजनीति का मतलब केवल भाषण या प्रचार नहीं, बल्कि ज़मीनी सरोकार और मानवता भी है। उन्होंने कहा कि उन बच्चों की मुस्कान उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
बेबी महतो लगातार झारखंड लोकतांत्रिक मोर्चा (JLKM) के मंच से झारखंडी अस्मिता, मातृभाषा, अधिकार और राजनीतिक भागीदारी की आवाज़ बुलंद कर रही हैं। वह चाहती हैं कि महिलाएं केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित न रहें, बल्कि पंचायत से लेकर संसद तक निर्णय की कुर्सी पर बैठें।
आज झारखंड को जिस प्रकार के नेतृत्व की ज़रूरत है, उसमें बेबी महतो जैसी निडर, स्पष्टवादी और समाज के प्रति समर्पित महिला का होना न सिर्फ़ प्रेरक है, बल्कि आवश्यक भी। कोल्हान की यह शेरनी अब केवल एक क्षेत्रीय पहचान नहीं, बल्कि झारखंड के सामाजिक और राजनीतिक पुनर्निर्माण की नई आशा बन चुकी हैं।


