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रामपुर में सड़क निर्माण की मांग तेज, पांच मौजा के ग्रामीण हुए एकजुट, जनप्रतिनिधियों पर जताया आक्रोश  

 

 

राजनगर प्रखंड के बड़ा सिजुलता पंचायत अंतर्गत रामपुर गांव में मंगलवार को सड़क निर्माण की मांग को लेकर पांच मौजा के ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। रामपुर, हेंसल, फुफडीह समेत आसपास के कई गांवों के ग्राम प्रधानों और सैकड़ों ग्रामीणों ने रामपुर की जर्जर सड़क को लेकर प्रदर्शन किया और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई।

 

ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 75 वर्षों के बाद भी इस गांव में पक्की सड़क नहीं बनी है। रामपुर से फुफडीह मुख्य पथ तक लगभग एक हजार फीट लंबा मार्ग पूरी तरह से कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो गया है। बरसात के मौसम में हालात और भी बदतर हो गए हैं। सड़क इतनी खराब हो चुकी है कि मोटरसाइकिल तो दूर, पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है।

 

ग्रामीणों ने बताया कि यह मार्ग हेंसल को फुफडीह मुख्य मार्ग से जोड़ता है, जिससे प्रतिदिन सैकड़ों गाड़ियों का आवागमन होता है। लेकिन सड़क की हालत ऐसी है कि बीमार व्यक्ति होने पर एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। बच्चे स्कूल जाने के दौरान इसी मार्ग से फिसल कर गिर जाते हैं, जिससे अक्सर चोटिल हो जाते हैं।

 

फुफडीह ग्राम प्रधान पृथ्वी राज सोरेन ने मौके पर कहा, “यह सड़क न केवल रामपुर बल्कि पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा है। वर्षों से ग्रामीण मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन दोनों ही आंख मूंदे हुए हैं। अगर अब भी इस मांग को नजरअंदाज किया गया, तो हम सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।”

 

वहीं रामपुर ग्राम प्रधान गोबिन्द टुडू ने भी प्रशासन पर नाराजगी जताते हुए कहा, “गांव के लोग हर साल इस सड़क को लेकर उम्मीद करते हैं, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगती है। जब तक यह सड़क नहीं बनेगी, तब तक हमारे गांव का विकास अधूरा रहेगा। यह सिर्फ सड़क नहीं, हमारे गांव की ज़रूरत और अधिकार है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो गांव के लोग शांत नहीं बैठेंगे।”

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार पंचायत के मुखिया और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। आज तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे चुका है और उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर शीघ्र सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

 

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से इस सड़क का निर्माण अविलंब कराने की मांग की है ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके और गांव की जीवन रेखा कही जाने वाली इस सड़क पर फिर से आवागमन सुगम हो सके।

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