. “ड्रैगन फ्रूट की खेती ने बदली सतीश देवगम की तक़दीर”
लेकिन सतीश देवगम ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी परिस्थिति को बदलने का फैसला लिया। उन्होंने परंपरागत खेती की जगह कुछ नया करने की ठानी और ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। इस काम में उन्हें कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण यानी आत्मा (ATMA) योजना से मदद मिली। उन्होंने मृदा परीक्षण करवाया, सॉयल हेल्थ कार्ड का उपयोग किया और आधुनिक सिंचाई पद्धति अपनाई। इसके साथ ही उन्होंने खेती के नए तरीकों को सीखा और अपने खेतों में इस्तेमाल किया।


धीरे-धीरे उनके खेतों में ड्रैगन फ्रूट की अच्छी उपज होने लगी। फलों की गुणवत्ता भी बेहतर हुई और बाजार में उन्हें इसका अच्छा दाम मिलने लगा। इससे उनकी आमदनी में काफी बढ़ोतरी हुई। अब वे न केवल अपने परिवार का अच्छे से पालन-पोषण कर पा रहे हैं, बल्कि अपने बच्चों की पढ़ाई और परिवार की सेहत का भी पूरा ध्यान रख रहे हैं।

उनकी यह सफलता अब गांव के दूसरे किसानों को भी प्रेरित कर रही है। अब कई किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती की ओर बढ़ रहे हैं। सतीश देवगम की यह कहानी इस बात का उदाहरण है कि अगर किसान मेहनत करें और नई तकनीकों को अपनाएं, तो खेती से भी आत्मनिर्भर बना जा सकता है।


