राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र को मिलेगी नई पहचान, संरक्षण और संवर्धन को लेकर संस्कृति मंत्रालय ने शुरू की पहल
सरायकेला/29 जुलाई 2025:


विश्वप्रसिद्ध सरायकेला छऊ नृत्य को एक बार फिर नई ऊर्जा मिलने जा रही है। झारखंड सरकार के संस्कृति, कला, खेल एवं युवा कार्य विभाग की ओर से राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र, सरायकेला के संरक्षण और पुनर्विकास की दिशा में वर्षों बाद ठोस पहल की गई है। यह उपलब्धि सरायकेला छऊ आर्टिस्ट एसोसिएशन के कलाकारों के लंबे संघर्ष और निरंतर प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है।
हाल ही में संस्कृति निदेशालय, रांची में निदेशक की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें कलाकारों, प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में केंद्र के भौतिक और संस्थागत विकास से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए।
बैठक में प्रमुख रूप से कला केंद्र के जर्जर भवन को भवन निर्माण विभाग के माध्यम से ध्वस्त कर बहुउद्देशीय सांस्कृतिक भवन के निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया। इसके साथ ही केंद्र के रिक्त पदों के साथ-साथ 15 नए पदों के सृजन हेतु विभागीय प्रक्रिया प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया।
छऊ नृत्य की विरासत को शिक्षा से जोड़ने के लिए इसके इतिहास और साहित्य पर आधारित सिलेबस तैयार करने हेतु कार्य योजना बनाई जाएगी। वहीं, पूर्व में स्वीकृत कलाकारों को पेंशन भुगतान शीघ्र किए जाने एवं नए पेंशन आवेदन के लिए ऑनलाइन पोर्टल जल्द खोले जाने का निर्णय लिया गया है।
बैठक में उपस्थित प्रमुख नामों में शामिल रहे—
निदेशालय के विवेक जी और अर्जुन जी, अनुमंडल पदाधिकारी, जिला खेल पदाधिकारी,
सरायकेला छऊ आर्टिस्ट एसोसिएशन के संरक्षक मनोज कुमार चौधरी,
संघ अध्यक्ष भोला महंती,
राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के समन्वयक सुदीप कुमार,
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त कलाकार ब्रजेंद्र पटनायक,
वरिष्ठ कलाकार नाथू महतो, पूर्व निदेशक तपन पटनायक,
तरुण कुमार भोल, आशीष कुमार कर, बंधु महतो, अविनाश कवि, गोपाल पटनायक,
निवारण महतो, शहनाई वादक सुधांशु शेखर पानी, पारसनाथ पुथाल,
तथा अनुमंडल कार्यालय के प्रधान सहायक राजेश महापात्र, नाजीर कृष्णा सोय।
कला और संस्कृति से जुड़ा यह निर्णय सरायकेला की पहचान को फिर से सशक्त करने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है। स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक संगठनों ने सरकार की इस पहल का स्वागत किया है।

