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नारायणपुर में अनोखी परंपरा, सांपों की देवी मनसा पूजा में नागों की होती है आराधना

पोटका। पोटका प्रखंड अंतर्गत हरिणा पंचायत के नारायणपुर गांव में श्रावणी संक्रांति के अवसर पर इस वर्ष भी मनसा पूजा बड़े धूमधाम से संपन्न हुई। पूजा स्थल पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और मां मनसा देवी के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा।

 

गांव के मुख्य पुजारी सुकुमार मंडल ने बताया कि लगभग ढाई सौ वर्ष पूर्व जब नारायणपुर गांव की स्थापना हुई थी, उस समय वर्धमान से आए कुछ परिवारों ने मां मनसा देवी को ग्रामदेवी के रूप में प्रतिष्ठित किया। तब से हर वर्ष यह पूजा परंपरा के रूप में आयोजित की जाती है।

 

मां मनसा की पूजा यहां तीन चरणों में होती है—तुलसी मंच, हांड़ी थान और स्थायी प्रतिमा स्थल पर। संक्रांति के दिन विशेष विधि-विधान के साथ ‘वारी’ लाई जाती है। दूसरे दिन सभी परिवार मिलकर पकवान तैयार करते हैं, जिसे भोग अर्पित करने के बाद प्रसाद स्वरूप पूरे गांव में वितरित किया जाता है। इस अवसर पर ‘हांड़ी पूजा’ भी होती है और बासी अन्न को प्रसाद के रूप में सभी घरों में बांटा जाता है।

 

पूजा का सबसे अनोखा और अद्भुत पहलू नागों की पूजा है। संक्रांति से एक सप्ताह पूर्व गांव के लोग जंगल से जीवित नाग सांपों को पकड़कर लाते हैं। इन्हें मां मनसा के समक्ष विधिपूर्वक पूजा जाता है और श्रद्धालुओं को दर्शन कराया जाता है। एक सप्ताह तक गांव में रहने के बाद इन नागों को पुनः जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया जाता है।

 

पूजा के अंतिम दिन बली का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि मां मनसा देवी की आराधना से गांव में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।

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