माताजी आश्रम में बहुभाषी कवि सम्मेलन, श्रोताओं ने लिया विविध भाषाओं का आनंद
हाता, 22 सितम्बर।


महालय के शुभ अवसर पर दिनांक 21 सितम्बर को माताजी आश्रम, हाता में झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद का 22वाँ वार्षिक उत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित बहुभाषी कवि सम्मेलन कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा, जिसमें बंगला, हिंदी, अंग्रेज़ी, संथाली, भूमिज और मुंडारी भाषा के कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ अपराह्न 2 बजे हुआ। कार्यक्रम का संचालन परिषद के सचिव शंकर चंद्र गोप ने किया। कवियों का स्वागत कृष्णकांत मंडल ने किया।

इस दौरान टांग राइन निवासी जयहरि सिंह मुंडा ने भूमिज भाषा में “सिंबि एकाब जाना” कविता का पाठ कर ग्रामीण जीवन की संवेदनाओं को प्रस्तुत किया। वरिष्ठ कवि श्रीनिवास मंडल ने बंगला कविता “श्मशान यात्री” के माध्यम से जीवन की गहन सच्चाइयों को उजागर किया। परशुडीह निवासी भवतारण मंडल ने “मोबाइल का करिश्मा” कविता सुनाकर आधुनिक जीवन की विसंगतियों पर व्यंग्य किया।
महिला कवि बीथिका मंडल ने बंगला कविता “शांति के खोज में” प्रस्तुत की, वहीं खैरपाल निवासी अमल कुमार दास ने अपनी हिंदी कविता “मा-बाप का प्यार” से श्रोताओं की भावनाओं को छुआ। केण्डमुरी के रविकांत भकत ने बंगला कविता “निरब शिखार गान” से समाज की विसंगतियों को सामने रखा।

पोटका के चर्चित कवि सुनील कुमार दे की हिंदी कविता “गाँव को गाँव रहने दो, उसको शहर मत बनाओ” ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। नुआग्राम के वरिष्ठ कवि शंकर चंद्र गोप ने “बैचैनी क्यों” कविता से जीवन की सच्चाईयों पर प्रकाश डाला। छोलागोड़ा के निशित कुमार दास ने भूमिज भाषा में “सिमी बेगाहा अ बिचार” कविता सुनाई। शंकरदा के सुविख्यात कवि करुणामय मंडल ने “हाल ए झारखंड” कविता के माध्यम से राज्य की परिस्थितियों पर पैनी टिप्पणी की।
इसके अलावा माणिक काल महतो (बंगला), विकास कुमार भकत (अंग्रेज़ी), चिंतामणि त्रिपाठी (हिंदी), मुक्त राम भकत (हिंदी) और अरविंद कुमार दे (बंगला) ने भी अपनी-अपनी कविताओं से श्रोताओं को खूब मनोरंजन किया।

कार्यक्रम के अंत में राजकुमार साहू ने सभी कवियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। कवि सम्मेलन के बाद त्रिलोचन विद्यापीठ के छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

