सारंडा संरक्षण पर उठे गंभीर सवाल, रामहरि ने कॉरपोरेट कब्जे की संभावनाओं को बताया चिंता का विषय
चाईबासा। एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व प्रत्याशी रामहरि पेरियार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सारंडा वन के 31,468 हेक्टेयर क्षेत्र को वाइल्डलाइफ सेंचुरी घोषित करना जनता और पर्यावरण की भलाई के बजाय कॉरपोरेट हितों को साधने की तैयारी लग रही है।


पेरियार ने कहा कि सारंडा का संरक्षण आवश्यक है, लेकिन यह संरक्षण जनता और प्रकृति के लिए होना चाहिए, न कि खनन और कॉरपोरेट कंपनियों के लिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि जंगल बचाने के नाम पर सबसे पहले सेल और अन्य खनन लीज रद्द की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अन्यथा यह फैसला संरक्षण नहीं, बल्कि विस्थापन और कॉरपोरेट कब्जे की वैधानिक साजिश साबित होगा।
रामहरि पेरियार ने कहा कि सारंडा, जिसे एशिया का सबसे बड़ा साल वन और झारखंड का पर्यावरणीय फेफड़ा कहा जाता है, अब वाइल्डलाइफ सेंचुरी के नाम पर नए खतरे में है। सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बावजूद सरकार की नीतियों और खनन कंपनियों को अभयारण्य क्षेत्र से छूट देने के निर्णय ने यह स्पष्ट कर दिया कि असली मकसद पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि कॉरपोरेट हित सुरक्षित करना है।

