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कुड़मी-कुर्मी को अजजा में शामिल के मांग के विरोध में आदिवासी संगठन की रैली व जनसभा

 

चांडिल : आदिवासी संगठनों ने कुड़मी-कुर्मी को अजजा में शामिल के मांग के विरोध में शनिवार को नीमडीह प्रखंड के रघुनाथपुर डाक बंगला से प्रखंड कार्यालय तक रैली निकाली। आदिवासी संगठन ने महामहिम राष्ट्रपति एवं झारखंड के राज्यपाल के नाम प्रखंड विकास पदाधिकारी को तीन सूत्री मांगपत्र सौंपा। मांग पत्र में लिखा गया है कि कुड़मी/कुरमी महतो के अनुसूचित जनजाति सूची में समावेशन के मांग को अस्वीकार की जाय, सरना धर्म कोड को मान्यता दिया जाय व झारखंड में पेसा एक्ट 1996 को लागू किया जाय।

 

पत्र में लिखा गया है कि कुरमी महतो जाति एक कृषक जाति है, झारखण्ड सरकार ने दिनांक 8.12.2004 और 6.1.2005 के पत्रों के माध्यम से कुरमी कुडमी (महतो) समुदाय को झारखंड की अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा था एवं दिनांक 10.2.2015 के पत्र के माध्यम से टी आर आई का रिपोर्ट प्रस्तुत किया, जिसमे कुडमी कुरमी महतो समुदाय को कुनबी की उपजाति बताते हुए अनिवार्य मापदंडों का अभाव है का उल्लेख किया गया। कुडमी/कुरमी महतो समुदाय ऐतिहासिक रूप से स्थानीय आदिवासियों के साथ रहते आ रहे लेकिन इनकी भाषा, संस्कृति, पूजा पद्धति, वेश भूषा बिल्कुल अलग है एवं आदिवासी से आर्थिक तथा सामाजिक रूप से अधिक प्रगतिशील जाति है।

यदि यह प्रगतिशील जाति का एस टी सूची में समावेश होता है तो अनुसूचित जनजाति वर्ग अधिक हासिए पर चला जायेगा। कुरमी/महतो के एसटी में समावेशन के मांग को अस्वीकार किया जाए। झारखण्ड के आदिवासी समुदाय प्रकृति पूजक है तथा वर्षों से अपने लिए सरना धर्म कोड की मांग कर रहे हैं। आदिवासियों के अलग धर्म कोड सरना को मान्यता दिया जाए एवं झारखण्ड में पेसा एक्ट 1996 को लागू किया जाए। इस अवसर पर आदिवासी भूमिज मुंडा चुआड़ सेना के अध्यक्ष मानिक सिंह सरदार, नीमडीह के जिला परिषद सदस्य असित सिंह पात्र, श्यामल मार्डी, सुरेंद्र सिंह सरदार आदि उपस्थित थे।

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