जमशेदपुर: मोटर ट्रेनिंग सेंटरों की मनमानी, प्राइवेट नंबर की गाड़ियों से दी जा रही ट्रेनिंग, सरकार को लग रहा राजस्व का चूना
जमशेदपुर/ शहर में मोटर ट्रेनिंग सेंटरों की मनमानी इन दिनों चरम पर है. कई सेंटर ऐसे हैं जो सरकार और परिवहन विभाग के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं. नियम के अनुसार किसी भी मोटर ट्रेनिंग सेंटर को ड्राइविंग सिखाने के लिए कमर्शियल (व्यावसायिक) नंबर की गाड़ी का उपयोग करना अनिवार्य है. लेकिन शहर के अधिकांश ट्रेनिंग सेंटर प्राइवेट नंबर प्लेट वाली कारों से ही युवाओं और युवतियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं.


यह न केवल मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन है, बल्कि सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान भी पहुंचा रहा है. इन ट्रेनिंग सेंटरों द्वारा निजी नंबर की कारों को ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल कर कमर्शियल टैक्स और लाइसेंस शुल्कों से बचा जा रहा है. यह सीधी-सीधी राजस्व चोरी की श्रेणी में आता है.
साकची, बर्मामाइंस, सोनारी, परसुडीह, कपाली और मानगो जैसे क्षेत्रों में दिनभर L बोर्ड लगी प्राइवेट नंबर की गाड़ियाँ सड़कों पर दौड़ती हुई देखी जा सकती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे वाहनों से दुर्घटना की आशंका भी बढ़ जाती है, क्योंकि प्रशिक्षु चालकों को ट्रैफिक नियमों का पूर्ण अनुभव नहीं होता.
यदि कोई ऐसी ट्रेनिंग कार किसी हादसे में शामिल हो जाए, तो बीमा और कानूनी प्रक्रिया बेहद जटिल हो जाती है, क्योंकि वाहन का उपयोग उसके पंजीकरण की शर्तों के विपरीत हो रहा होता है. स्थानीय नागरिकों ने परिवहन विभाग से इस पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.
लोगों का कहना है कि यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि सड़क सुरक्षा और सरकारी राजस्व दोनों के साथ खिलवाड़ है. सवाल यह है कि आखिर इन अवैध मोटर ट्रेनिंग सेंटरों पर कार्रवाई कब होगी और इस राजस्व चोरी की जिम्मेदारी कौन लेगा.

