डीएसपी के सख्त निर्देशों के बावजूद पदमपुर मेले में जुआ का खेल जारी — खरसवां थाना प्रभारी की कार्यशैली पर उठे सवाल देखें video
झारखंड के सरायकेला-खरसवां जिले में आयोजित ऐतिहासिक पदमपुर मेला का इस बार समापन तो हो गया, लेकिन पीछे छोड़ गया कई सवाल।


128 साल पुराना यह मेला राज्य भर में अपनी भव्यता और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। हर साल की तरह इस बार भी सात दिन तक चलने वाले इस मेले में एक लाख से अधिक श्रद्धालु मां काली की पूजा-अर्चना करने पहुंचे, मेले का आनंद लिया — लेकिन इस आस्था के बीच अंधेरे का एक खेल भी चलता रहा।
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मेले की शुरुआत से पहले प्रशासन की ओर से शांति समिति की बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें डीएसपी ने साफ और सख्त निर्देश दिए थे —
“जुआ, सट्टा और अवैध शराब की बिक्री किसी भी कीमत पर नहीं होनी चाहिए।”
लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही रही। प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद मेले में खुलेआम जुआ खेला गया — और हज़ारों लोग इस जुए की गिरफ्त में आए।
गांव की ही एक महिला ने वीडियो और तस्वीरें हमसे शेयर कर पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
नाम उजागर न करने की शर्त पर महिला ने बताया —
“मेरे पति मेले में बादाम का ठेला लगाते हैं। लेकिन हर शाम जुए की लत उन्हें अपनी ओर खींच लेती है। इस बार तो दिनभर की कमाई ही नहीं, पूरी पूंजी भी जुए में हार गए। अब घर चलाना मुश्किल हो गया है।”
महिला की आंखों में आंसू थे और सवाल भी —
“जब पुलिस हर वक्त गश्त कर रही थी, तो फिर ये जुआ चलता कैसे रहा?”
स्थानीय लोगों का कहना है कि मेले में जुए के अड्डे खुलेआम चल रहे थे और पुलिस मौन दर्शक बनी रही।
लोगों ने खरसवां थाना प्रभारी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं और मांग की है कि इस मामले में जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए।
पदमपुर मेला, जो एक समय श्रद्धा और परंपरा का प्रतीक माना जाता था, अब प्रशासनिक लापरवाही और सामाजिक बुराइयों की तस्वीर पेश कर रहा है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या कदम उठाता है —
क्या जुए के इस खेल पर लगाम लगेगी या फिर हर साल की तरह मेले की रौनक के साथ जुए की परछाई भी लौट आएगी?

