13 नवंबर से पहले बनेगी पेसा नियमावली, तब तक जारी रहेगी बालू की किल्लत”
झारखंड में बालू संकट फिलहाल जारी रहेगा। पेसा नियमावली के गठन की प्रक्रिया अभी अधूरी है, और उम्मीद है कि 13 नवंबर से पहले इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है। कैबिनेट की पिछली बैठक में पेसा नियमों का मसौदा एजेंडे में शामिल नहीं था। सरकार के वकील ने हाईकोर्ट को बताया था कि नियमों का ड्राफ्ट मुख्यमंत्री को भेजा गया है और जल्द ही इसे कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा।


गौरतलब है कि आदिवासी बुद्धिजीवी मंच की अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने बालू घाटों के आवंटन पर रोक लगाई थी। अदालत का कहना है कि जब तक पेसा नियम अधिसूचित नहीं हो जाते, तब तक रेत खनन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। मंच का तर्क है कि बिना ग्राम सभा की सहमति के रेत घाटों की नीलामी और डीएमएफटी निधि का खर्च दोनों ही अवैध हैं।
राज्य सरकार का पक्ष है कि बालू उत्खनन पर रोक से विकास कार्यों पर असर पड़ रहा है। वहीं अदालत का कहना है कि पहले पेसा अधिनियम के तहत ग्राम सभाओं का गठन जरूरी है। ऐसे में अब उम्मीद की जा रही है कि कैबिनेट की विशेष बैठक बुलाकर 13 नवंबर से पहले नियमावली पर मुहर लगाई जा सकती है, तभी बालू संकट का समाधान संभव होगा।

