एमबीएनएस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन में कार्यशाला और भाषण प्रतियोगिता आयोजित
“रक्तदान के बारे में मिथक और तथ्य” विषय पर छात्रों ने ली जागरूकता की शपथ


जमशेदपुर:झारखंड के 25वें स्थापना दिवस के अवसर पर एमबीएनएस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, जमशेदपुर में गुरुवार को दूसरे दिन “रक्तदान के बारे में मिथक और तथ्य” विषय पर कार्यशाला और भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ब्रह्मानंद हॉस्पिटल के सहयोग से आयोजित हुआ।
कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में श्री शक्ति धारी सिंह, एडमिनिस्ट्रेटर (नारायणा हेल्थ, जमशेदपुर) उपस्थित रहे। उन्होंने छात्रों को रक्तदान के महत्व और इससे जुड़ी भ्रांतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा, “रक्तदान एक महादान है — यह किसी की जिंदगी बचाने का सबसे सरल और मानवीय तरीका है।”
उन्होंने बताया कि रक्तदान से स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि यह शरीर में नई रक्त कोशिकाओं के निर्माण को प्रोत्साहित करता है।
श्री सिंह ने कहा कि रक्तदान से पहले दाता का वजन, उम्र और स्वास्थ्य की जांच की जाती है। उन्होंने छात्रों को बताया कि रक्तदान के बाद पर्याप्त आराम करना और तरल पदार्थों का सेवन जरूरी होता है।
कार्यशाला के दौरान छात्रों ने अपने सवाल रखे, जिनका श्री सिंह ने वैज्ञानिक तथ्यों के साथ उत्तर दिया।
संस्थान की निदेशक श्रीमती अनुपा सिंह ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि रक्तदान एक सामाजिक जिम्मेदारी है, जिसे हर सक्षम व्यक्ति को निभाना चाहिए। उन्होंने कहा, “रक्तदान केवल दान नहीं, बल्कि मानवता की सेवा है। हमें समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलानी चाहिए।”
कार्यशाला के अंत में छात्रों ने सामूहिक रूप से रक्तदान करने और इसके महत्व को समाज में फैलाने की शपथ ली।
कार्यक्रम में छात्रों ने भाषण प्रतियोगिता में भी हिस्सा लिया और रक्तदान से जुड़ी प्रेरक बातें साझा कीं।
संस्थान की ओर से बताया गया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं को रक्तदान के प्रति जागरूक करना और इससे जुड़े मिथकों को दूर करना है।
कार्यक्रम में संकाय सदस्य, छात्र-छात्राएं और ब्रह्मानंद हॉस्पिटल की टीम मौजूद रही।

