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झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा—लोकायुक्त, सूचना आयुक्त और मानवाधिकार आयोग की नियुक्ति कहां तक पहुँची?

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर लंबित नियुक्तियों को लेकर विस्तृत जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि लोकायुक्त, सूचना आयुक्तों और मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति प्रक्रिया किस स्तर पर है, इसे 28 नवंबर तक स्पष्ट किया जाए। अदालत राजकुमार द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें राज्य की लगभग दर्जनभर संस्थाओं में पद रिक्त रहने को लेकर प्रश्न उठाया गया है।

 

दूसरी ओर, भवन निर्माण नक्शा पास होने में देरी और अवैध वसूली से जुड़ी जनहित याचिका पर भी सुनवाई हुई। कोर्ट को बताया गया कि अब केवल 461 भवनों के नक्शे लंबित हैं, वह भी तकनीकी त्रुटियों के कारण। 3 जुलाई 2023 से अब तक 2529 आवेदन मिले, जिनमें से 2068 नक्शे BPAMS सिस्टम से स्वीकृत कर दिए गए। कोर्ट को बताया गया कि अब कोई भी आवेदन 30 दिनों से अधिक लंबित नहीं रहता। संतोषजनक प्रगति देखते हुए हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया।

 

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने जुलाई 2023 में नगर निगम और आरआरडीए में देरी व भ्रष्टाचार पर स्वतः संज्ञान लिया था, जिसके बाद सुनवाई लगातार जारी थी।

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