पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के बयान ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी, आदिवासी पहचान पर व्यक्त की चिंता
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने आदिवासी समाज की पहचान और अधिकारों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में उन्होंने आरोप लगाया कि बाहरी तत्व राज्य में जमीन, संस्कृति और सामाजिक संरचना पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय की जमीनों और अधिकारों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक है।


चंपाई सोरेन ने दावा किया कि जनसंख्या में अवैध रूप से वृद्धि करने वाले समूह स्थानीय संसाधनों और आरक्षण व्यवस्था पर भी असर डाल रहे हैं। उनका कहना है कि प्रस्तावित SIR व्यवस्था लागू होने से ऐसे मामलों की बेहतर पहचान हो सकेगी और प्रशासनिक कार्रवाई आसान होगी।
उन्होंने धर्मांतरण के मुद्दे को भी आदिवासी संस्कृति के लिए बड़ा खतरा बताया। उनके अनुसार, धर्मांतरण की बढ़ती घटनाएं सरना स्थलों, जाहेर स्थानों और पारंपरिक पूजा-पद्धतियों को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग धर्म परिवर्तन कर चुके हैं, उन्हें अपने नए धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है, लेकिन उन्हें आदिवासी आरक्षण और संबंधित लाभों से बाहर रखा जाना चाहिए।
चंपाई सोरेन ने ऐसे मामलों में डीलिस्टिंग की मांग उठाते हुए कहा कि इससे आदिवासी समाज की परंपरा, संस्कृति और अस्तित्व को मजबूत बनाया जा सकता है।


