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उद्भव 2025 कला महोत्सव में झारखंड का उत्कृष्ट प्रदर्शन, देश में हासिल किया चौथा स्थान

 

 

राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित उद्भव 2025 सांस्कृतिक एवं साहित्यिक महोत्सव में झारखंड के ईएमआरएस छात्रों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे देश में ओवरऑल चौथा स्थान प्राप्त किया। एनईएसटीएस द्वारा यह महोत्सव अमरावती (आंध्र प्रदेश) स्थित केएल यूनिवर्सिटी में आयोजित किया गया, जहाँ देशभर के 1600 से अधिक जनजातीय छात्रों ने भाग लिया। विविध प्रतियोगिताओं में अपने प्रभावशाली प्रदर्शन से झारखंड के छात्रों ने राज्य का गौरव बढ़ाया।

 

तोरसिंदुरी ईएमआरएस के छात्रों की शानदार उपलब्धि

ईएमआरएस तोरसिंदुरी के प्रतिभागियों ने कई श्रेणियों में उत्कृष्ट सफलता दर्ज की।

 

देशभक्ति गीत (सीनियर) — प्रथम स्थान

 

जनजातीय समूह गीत (सीनियर) — प्रथम स्थान

 

शास्त्रीय गीत (सीनियर) — द्वितीय स्थान

 

भक्ति गीत (सीनियर) — तृतीय स्थान

 

शिक्षा–हिंदी (सीनियर) — तृतीय स्थान

 

 

इन उपलब्धियों ने न केवल विद्यालय का सम्मान बढ़ाया बल्कि राज्य के सांस्कृतिक स्तर को भी देशभर में मजबूत पहचान दिलाई। शिक्षकों की श्रेणी में श्री मानश रॉय ने लोकगीत प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त कर अपनी कला से सबका दिल जीता।

गोड्डा ईएमआरएस ने प्रदर्शित की पारंपरिक शिल्पकला

ईएमआरएस गोड्डा के छात्रों ने स्थानीय शिल्प (सीनियर) प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। उनके प्रस्तुतिकरण ने झारखंड की पारंपरिक शिल्पकला को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

 

बसिया (गुमला) ईएमआरएस के छात्रों का दमदार प्रदर्शन

गुमला जिले के ईएमआरएस बसिया के प्रतिभागियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया—

 

वाद्य–जनजातीय प्रतियोगिता — प्रथम स्थान

 

लोक समूह गीत (सीनियर) — प्रथम स्थान

 

जनजातीय नृत्य (सीनियर) — द्वितीय स्थान

 

इन प्रस्तुतियों ने राज्य की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर जीवंत रूप से प्रदर्शित किया।

 

राज्य की संस्कृति और प्रतिभा का गौरवपूर्ण प्रदर्शन

उद्भव 2025 में झारखंड के छात्रों का प्रदर्शन उनकी मेहनत, अनुशासन और प्रतिभा का प्रमाण है। साथ ही यह राज्य की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, संगीत, नृत्य और कला परंपरा का प्रभावशाली प्रदर्शन भी है। ऐसे राष्ट्रीय मंच छात्रों को न केवल अवसर प्रदान करते हैं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझने और उन्हें सहेजने की प्रेरणा भी देते हैं।

 

झारखंड ने इस महोत्सव में अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि राज्य के युवा प्रतिभागी संस्कृति, साहित्य और कला के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान बनाने की क्षमता रखते हैं।

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