एम्बुलेंस नहीं मिलने की घटना से दुखी है पूर्व मंत्री, झारखंड सरकार को चेताया
चाईबासा(प्रकाश कुमार गुप्ता): पश्चिमी सिंहभूम जिले में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही और संवेदनहीनता का एक दुखद मामला सामने आया है। नोवामुंडी प्रखंड के बालजोड़ी गांव निवासी डिम्बा चतोम्बा के चार वर्षीय मासूम बच्चे की इलाज के दौरान चाईबासा सदर अस्पताल में मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद जो स्थिति सामने आई, उसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया।


परिजनों के अनुसार, बच्चे की मौत के बाद उन्होंने शव को गांव ले जाने के लिए अस्पताल प्रबंधन से एम्बुलेंस की मांग की। बताया गया कि परिजन घंटों तक अस्पताल परिसर में एम्बुलेंस का इंतजार करते रहे, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं की गई। आर्थिक रूप से बेहद कमजोर होने के कारण बच्चे के पिता के पास निजी वाहन की सुविधा भी नहीं थी। मजबूरी में उन्होंने अपने बच्चे के शव को एक थैले में रखकर बस से बालजोड़ी गांव ले जाने का दर्दनाक फैसला लिया।
इस हृदयविदारक घटना के सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। पूर्व मंत्री और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बड़कुंवर गागराई ने इस मामले को लेकर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की असंवेदनशीलता को दर्शाती है। उन्होंने सीधे तौर पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल हो गई है।
बड़कुंवर गागराई ने कहा कि आदिवासी और गरीब लोगों के साथ इस तरह की अमानवीय घटनाएं होना बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने का मामला, ब्लड बैंक की खराब स्थिति और अस्पतालों में मरीजों के लिए बेड की भारी कमी यह साबित करती है कि स्वास्थ्य विभाग की स्थिति चिंताजनक है। उनका आरोप है कि सरकार और स्वास्थ्य मंत्री को सिर्फ पद की चिंता है, जबकि आम जनता की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
उन्होंने झारखंड सरकार से मांग की कि लगातार हो रही ऐसी घटनाओं को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री को तत्काल पद से हटाया जाए। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी आक्रोश देखा जा रहा है और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग उठने लगी है।

