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ओल चिकि लिपि के 100 वर्ष पूर्ण होने पर हर्षोल्लास, संविधान ओल चिकि में छपने पर राष्ट्रपति को आभार

 

चांडिल :

ओल चिकि लिपि के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर शनिवार, 27 दिसंबर 2025 को सुबह 11 बजे कांडरबेड़ा स्थित गुरु गंके चौक में भव्य आयोजन किया गया। कोल्हान ट्राईबल हिरो श्री बाबु राम सोरेन के नेतृत्व में महान भाषा शिल्पी गुरु गंके पंडित रघुनाथ मुर्मू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर ओल चिकि लिपि की 100वीं वर्षगांठ मनाई गई।

इस अवसर पर हाल ही में भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय, विधायी विभाग (राजभाषा शाखा) द्वारा भारत के संविधान को संथाली भाषा की ओल चिकि लिपि में प्रकाशित किए जाने पर महामहिम राष्ट्रपति आदरणीया द्रौपदी मुर्मू के प्रति संथाल समाज की ओर से आभार व्यक्त किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री बाबु राम सोरेन ने कहा कि गुरु गंके पंडित रघुनाथ मुर्मू ने वर्ष 1925 में ओल चिकि लिपि का आविष्कार किया था और वर्ष 2025 में भारतीय संविधान का ओल चिकि लिपि में प्रकाशन उनके सपने के साकार होने जैसा है। उन्होंने बताया कि ओल चिकि लिपि को यूनिकोड की मान्यता प्राप्त है, वहीं संथाली भाषा को वर्ष 2003 में भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। संथाली साहित्य को साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा भी सम्मानित किया जाता रहा है।

उन्होंने विश्वास जताया कि अब ओल चिकि लिपि में पठन-पाठन से संथाली समाज के छात्र-छात्राएं आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, डॉक्टर, इंजीनियर, वकील जैसे उच्च पदों तक पहुंचेंगे। साथ ही उन्होंने झारखंड सरकार से मांग की कि ओल चिकि लिपि की पाठ्यपुस्तकों का शीघ्र प्रकाशन कर नर्सरी से लेकर उच्च शिक्षा तक सभी सरकारी विद्यालयों में संथाली भाषा की पढ़ाई शुरू की जाए।

कार्यक्रम में विजय मुर्मू, मांझी बाबा इन्द्र टुडू, बाबलु सोरेन, अनिता सोरेन, परमेश्वर मार्डी, ममता, माला, सुमित्रा सोरेन, राम मुर्मू सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।

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