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जमशेदपुर की सड़कों पर चौथा डहरे टुसु परब, 4 जनवरी को होगा आयोजन

 

परंपरा, प्रकृति और बराबरी का प्रतीक बना सांस्कृतिक आंदोलन

जमशेदपुर। शहर की सड़कों पर लोकसंस्कृति को उसके मूल स्वरूप में जीवित रखने का संदेश लेकर चौथे डहरे टुसु परब का आयोजन आगामी 4 जनवरी 2026 को किया जाएगा। इससे पहले डहरे टुसु परब के तीन आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं, जिनमें ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता देखने को मिली थी।

डहरे टुसु परब को लेकर फैली भ्रांतियों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता दीपक रंजीत ने कहा कि यह कोई नई या कृत्रिम परंपरा नहीं है, बल्कि टुसु के मूल दर्शन की पुनर्स्थापना है, जो प्रकृति, अन्न और श्रम से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि समय के साथ टुसु परब मंच, मूर्ति और वीआईपी संस्कृति तक सीमित होने लगा था, जबकि डहरे टुसु परब उसे फिर से आम लोगों के बीच लाने का प्रयास है।

उन्होंने यह भी कहा कि टुसु को मूर्ति के रूप में देखना लोकसंस्कृति की गलत व्याख्या है। टुसु धान और जीवन का प्रतीक है, जिसे जड़ वस्तु नहीं बल्कि सामूहिक और जीवंत प्रक्रिया के रूप में समझने की जरूरत है।

तैयारी बैठक को संबोधित करते हुए धनंजय महतो ने कहा कि वर्तमान समय में टुसु मेलों में प्रतिस्पर्धा और पुरस्कार केंद्र में आ गए हैं, जिससे परब की आत्मा पीछे छूटती जा रही है। डहरे टुसु परब इसी असमानता के खिलाफ खड़ा है, जहां सभी लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ चलते हैं। उन्होंने बताया कि इस बार आसपास के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और बुजुर्ग पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-धोमसा के साथ शामिल होंगे।

डोड़कासाईं, आसानबोनी में 30 दिसंबर को आयोजित तैयारी बैठक की अध्यक्षता करते हुए बनमली महतो ने कहा कि डहरे टुसु परब केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और सांस्कृतिक शुद्धता की दिशा में एक निरंतर प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र से हजारों लोग पारंपरिक परिधान और लोकवाद्य के साथ आयोजन में भाग लेंगे, ताकि टुसु परब की वास्तविक परंपरा अगली पीढ़ी तक पहुंचाई जा सके।

डहरे टुसु परब की खास पहचान यह है कि इसमें न कोई मंच होता है, न बैरिकेड और न ही वीआईपी व्यवस्था। यह एक ऐसा सांस्कृतिक आंदोलन है, जिसमें टुसु को देखने के बजाय महसूस किया जाता है—खेतों, पानी, गीतों और समान कदमों के साथ चलते लोगों के बीच।

तैयारी बैठक में दीपक रंजीत, बनमली महतो, स्वपन कुमार महतो, जयप्रकाश महतो, संजय कुमार दास, कुमार राम टुडू, गोबिंद सिंह सरदार, रविंद्र नाथ टुडू, धनंजय महतो, चक्रधर महतो, मनोरंजन महतो, भवेश महतो, काशी राम दास और सागर पाल सहित कई लोग उपस्थित थे।

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