मध्य विद्यालय आसनपाठ की पहल राष्ट्रीय स्तर पर सराही गई, शिक्षक विमल किशोर बोयपाई हुए सम्मानित
झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, रांची में “कौशल आधारित शिक्षा से युवा सशक्तीकरण” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों ने शिक्षक विमल किशोर बोयपाई की प्रस्तुति की सराहना की। उन्होंने “सीमित संसाधनों से ग्रामीण विद्यालय का रूपांतरण: एक नवाचार आधारित सफल केस स्टडी” विषय पर प्रस्तुति दी।


इस केस स्टडी में वर्ष 2017 से 2025 तक विद्यालय में आए शैक्षणिक बदलावों को विस्तार से बताया गया। वर्ष 2017 में विमल किशोर बोयपाई का स्थानांतरण मध्य विद्यालय आसनपाठ में हुआ था। उस समय विद्यालय में संसाधनों की कमी, छोटा परिसर, बच्चों की कम उपस्थिति, अभिभावकों की उदासीनता और सह-शैक्षिक गतिविधियों का अभाव जैसी कई चुनौतियां थीं।
इन चुनौतियों के बीच शिक्षक विमल ने विद्यालय की तस्वीर बदलने का संकल्प लिया। उन्होंने बच्चों के लिए विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियां शुरू कीं। बाल संसद के माध्यम से बच्चों में नेतृत्व क्षमता विकसित की गई और विद्यालय को साफ-सुथरा रखा गया। विद्यालय परिसर को फूलवारी और बागवानी से सजाया गया। बच्चों को कराटे, बॉक्सिंग और तीरंदाजी का प्रशिक्षण देना भी शुरू किया गया। अभिभावकों के साथ नियमित बैठक, वार्षिक खेलकूद और वनभोज का आयोजन विद्यालय की नियमित गतिविधियों में शामिल किया गया।
शिक्षक की कार्यशैली से प्रभावित होकर जिला शिक्षा विभाग की ओर से 50 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की गई, जिसका उपयोग विद्यालय को सजाने और संवारने में किया गया। आज मध्य विद्यालय आसनपाठ के बच्चे निजी विद्यालयों की तर्ज पर बैंड की धुन पर टी-शर्ट पहनकर परेड करते हैं। विद्यालय अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के लिए जिले के सरकारी विद्यालयों के लिए एक उदाहरण बन गया है।

प्रामाणिक केस स्टडी से प्रभावित होकर राष्ट्रीय सेमिनार में उपस्थित शिक्षाविदों के प्रतिनिधि मंडल और जेसीईआरटी के उपनिदेशक द्वारा शिक्षक विमल किशोर बोयपाई को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

