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डीएमएफटी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा, लंबित योजनाओं पर सख्ती के निर्देश 

 

चाईबासा(प्रकाश कुमार गुप्ता): पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त चंदन कुमार की अध्यक्षता में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) मद से संचालित आधारभूत संरचना निर्माण योजनाओं की प्रगति को लेकर समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, निदेशक लेखा प्रशासन सह स्वनियोजन सुनीला खलको, विभिन्न कार्यकारी विभागों के कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

 

समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने बताया कि डीएमएफटी मद से अब तक लगभग 1712 करोड़ रुपये की राशि विभिन्न कार्यकारी विभागों को जारी की गई है, जिसमें से 1387 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जा चुकी है। वहीं 1273 करोड़ रुपये का उपयोगिता प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है। इस पर उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिन योजनाओं के उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित हैं, उनकी जांच कर सभी कार्यकारी विभाग तीन दिनों के भीतर प्रमाण पत्र जमा करना सुनिश्चित करें।

 

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि विभिन्न कार्यकारी विभागों के अलग-अलग खातों में डीएमएफटी मद की लगभग 295 करोड़ रुपये की राशि अवशेष है। इस पर उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जो राशि एक वर्ष से अधिक समय से खातों में पड़ी है, उसका मूल्यांकन कर नियमों के अनुसार एक सप्ताह के भीतर वापस करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

 

डीएमएफटी अंतर्गत संचालित पेयजल योजनाओं की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने संबंधित कार्यपालक अभियंता एवं डीएमएफटी पीएमयू टीम को निर्देश दिया कि सभी संचालित योजनाओं की वर्तमान स्थिति, संचालन एवं संधारण मद की भुगतान स्थिति से संबंधित विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा वर्ष 2024-25 में आवंटित योजनाओं में टेंडर निष्पादन एवं एग्रीमेंट की स्थिति की जांच कर भौतिक प्रगति रिपोर्ट देने का भी निर्देश दिया गया।

 

समीक्षा के क्रम में वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19, 2019-20, 2020-21, 2021-22, 2022-23 एवं 2023-24 में स्वीकृत योजनाओं में से लंबित योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की गई।

 

उपायुक्त ने निर्देश दिया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 तक स्वीकृत जिन योजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है, तथा वित्तीय वर्ष 2023-24 में स्वीकृत जिन योजनाओं में अब तक कार्य प्रगति शून्य है, उन सभी योजनाओं को रद्द करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए।

 

इसके साथ ही उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में उन्हीं कार्यकारी विभागों को नई योजनाएं आवंटित की जाएंगी, जिनके द्वारा पूर्व में आवंटित योजनाओं में अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित की जाएगी।

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