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दावोस में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का संदेश: झारखंड सिर्फ खनिज निर्यातक नहीं बनेगा

दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि झारखंड अब केवल खनिजों के निर्यात तक सीमित राज्य बनकर नहीं रहना चाहता। भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित उच्चस्तरीय राउंडटेबल बैठक में उन्होंने राज्य के सतत और समावेशी विकास के रोडमैप को वैश्विक मंच पर रखा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की नीति संसाधनों के अंधाधुंध दोहन की नहीं, बल्कि उनके मूल्य संवर्धन और जिम्मेदार उपयोग की है। सरकार का उद्देश्य ऐसा औद्योगिक विकास करना है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ें और स्थानीय लोगों, खासकर आदिवासी समुदायों को प्रत्यक्ष लाभ मिले। उन्होंने यह भी कहा कि सतत विकास केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आजीविका, कौशल विकास और सामाजिक समावेशन भी शामिल है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार खनिज आधारित डाउनस्ट्रीम उद्योग, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित तकनीक और मानव संसाधन विकास को प्राथमिकता दे रही है। साथ ही पर्यटन क्षेत्र को भी विकास का मजबूत आधार बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक पर्यटन से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने वैश्विक निवेशकों से जिम्मेदार खनन, सतत विनिर्माण और पर्यटन अवसंरचना के क्षेत्र में झारखंड के साथ साझेदारी का आह्वान किया।

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