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शहादत दिवस पर कांग्रेस भवन चाईबासा में महात्मा गांधी को दी गई श्रद्धांजलि  

 

 

चाईबासा(प्रकाश कुमार गुप्ता): राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का शहादत दिवस शुक्रवार को कांग्रेस भवन, चाईबासा में मनाया गया। इस अवसर पर महात्मा गांधी के चित्र के समक्ष दो मिनट का मौन रखकर प्रार्थना सभा आयोजित की गई। इसके बाद गांधी जी के विचारों पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ।

 

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष रंजन बोयपाई ने कहा कि महात्मा गांधी आज भले ही हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके विचार आज भी जीवित और प्रासंगिक हैं।

 

उन्होंने कहा कि गांधी एक ऐसे राजनीतिज्ञ थे, जिन्होंने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया और आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्र भारत दिया। उनका संघर्ष सत्य और अहिंसा पर आधारित था। सत्य को उन्होंने भगवान माना और अहिंसा को अपना मुख्य हथियार बनाया।

 

उन्होंने कहा कि गांधी का प्रिय भजन “वैष्णव जन” यह संदेश देता है कि वही इंसान सच्चा होता है, जो दूसरों की पीड़ा को समझे। हमें उनके विचारों को अपनाना चाहिए।

 

गांधी के विचारों पर व्याख्यान देते हुए कांग्रेस जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय ने कहा कि गांधी पहले बापू बने, फिर महात्मा और अंत में राष्ट्रपिता के रूप में पहचाने गए। उन्होंने बताया कि असहयोग आंदोलन की शुरुआत चंपारण से हुई, जिसने अंग्रेजों के खिलाफ एक बड़े आंदोलन का रूप लिया। नमक सत्याग्रह, दांडी मार्च और भारत छोड़ो आंदोलन ने अंग्रेजों को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि गांधी द्वारा चलाए गए आंदोलन पूरी तरह अनुशासित और अहिंसक थे, जिसने उस समय की सबसे शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार को भी झुकने पर मजबूर कर दिया।

 

इस अवसर पर कांग्रेस जिला सचिव जानवी कुदादा, ओबीसी प्रकोष्ठ अध्यक्ष रंजीत यादव, पूर्व जिला कोषाध्यक्ष राधा मोहन बनर्जी, नगर महासचिव बिट्टू सिंह, वरीय कांग्रेसी संतोष सिन्हा, विजय सिंह तुबिद, प्रताप पुरती, कार्यालय सचिव सुशील दास सहित कई कांग्रेसी उपस्थित थे।

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