ग्रामीण आय और आजीविका बढ़ाने को लेकर उपायुक्त की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक
चाईबासा(प्रकाश कुमार गुप्ता): पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त चंदन कुमार की अध्यक्षता में कृषि, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता, भूमि संरक्षण और गव्य विकास से जुड़े कार्यक्रमों को सशक्त बनाने को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर इन योजनाओं को गति देकर ग्रामीणों की आय और आजीविका में वृद्धि करना रहा।


बैठक में उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, अपर उपायुक्त प्रवीण केरकट्टा के अलावा जिला कृषि पदाधिकारी, जिला सहकारिता पदाधिकारी, जिला उद्यान पदाधिकारी, जिला गव्य विकास पदाधिकारी, जिला पशुपालन पदाधिकारी, जिला मत्स्य पदाधिकारी, भूमि संरक्षण पदाधिकारी, डीएमएफटी पीएमयू सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।
उपायुक्त ने सभी विभागों से संचालित योजनाओं की अद्यतन जानकारी ली और जमीनी स्तर पर उपलब्ध संसाधनों व समूहों को मजबूत कर रोजगार सृजन बढ़ाने पर चर्चा की।
कृषि मशीनरी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जिले के सभी 18 प्रखंडों में स्वयं सहायता समूह या किसान उत्पादक समूह के माध्यम से कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने पर चर्चा हुई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि भूमि संरक्षण विभाग से जुड़े समूहों के पास उपलब्ध कृषि यंत्रों और आवश्यक उपकरणों की सूची व प्राक्कलन तैयार किया जाए। इन यंत्रों को निर्धारित दर पर किसानों को किराए पर उपलब्ध कराने की शर्त रखी गई।
सब्जी उत्पादन बढ़ाने के लिए क्षेत्रानुसार हाईटेक पॉलीहाउस नर्सरी संचालन हेतु तीन एकड़ भूमि चिन्हित करने और प्राक्कलन तैयार करने का निर्देश दिया गया। हॉर्टिकल्चर क्लस्टर डेवलपमेंट के तहत नारंगी, केला, कटहल, सरीफा जैसे फलों के उत्पादन और प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। संबंधित विभागों को उत्पादन क्षेत्र, क्षमता और बाजार मूल्य का भौतिक सत्यापन कर प्रतिवेदन देने को कहा गया।
मत्स्य क्षेत्र में आय बढ़ाने के लिए मत्स्य बीज, स्पॉन, फिशफीड की उपलब्धता और स्थानीय स्तर पर हैचरी व फीड उत्पादन की संभावनाओं पर चर्चा हुई। केज कल्चर के माध्यम से 100 नए परिवारों को मछली पालन से जोड़ने का निर्देश दिया गया।
बैठक में दुग्ध उत्पादक समिति गठन, चारा उत्पादन, कोल्ड स्टोरेज की स्थिति, पोल्ट्री और मोती उत्पादन जैसे विषयों पर भी आवश्यक निर्देश दिए गए।

