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योग को केवल एक दिन का उत्सव न बनाएं, इसे जीवनशैली में अपनाएं : डॉ. रमेश कुमार

जमशेदपुर। आगामी 21 जून को देशभर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर श्रीनाथ यूनिवर्सिटी के योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. रमेश कुमार ने लोगों से योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की अपील की है।

डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि योग को केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे नियमित रूप से अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों में अभी भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। गंभीर बीमारी या बेहतर इलाज के लिए लोगों को अक्सर रांची या पटना जैसे बड़े शहरों की ओर जाना पड़ता है। ऐसे में योग लोगों को स्वस्थ रखने का एक सरल और प्रभावी माध्यम बन सकता है।

उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों से योग दिवस मनाया जा रहा है, लेकिन अभी भी बहुत कम लोग इसे अपने दैनिक जीवन में शामिल कर पाए हैं। अक्सर देखा जाता है कि छोटी-छोटी शारीरिक परेशानियों में लोग बिना डॉक्टर की सलाह के दवा का सेवन कर लेते हैं, जो आगे चलकर स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि योग एक प्राकृतिक पद्धति है, जो शरीर के साथ-साथ मन और आत्मा को भी संतुलित बनाए रखने में सहायक है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि यदि सुबह समय नहीं मिल पाता है तो शाम को भी कुछ समय निकालकर योगाभ्यास किया जा सकता है। सप्ताह में चार से पांच दिन नियमित रूप से योग करने से स्वास्थ्य बेहतर रहता है और दवाइयों पर होने वाला अनावश्यक खर्च भी कम हो सकता है।

योग के महत्व को समझाते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह किसी चीज का असली स्वाद उसे अनुभव करने से ही पता चलता है, उसी तरह योग के लाभ भी नियमित अभ्यास से ही महसूस किए जा सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में योग सीखने के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं। आसपास के क्षेत्रों में योग प्रशिक्षक और योग केंद्र आसानी से मिल जाते हैं, जहां से सही मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है।

अंत में डॉ. रमेश कुमार ने लोगों से अपील की कि वे योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं और नियमित अभ्यास के माध्यम से स्वस्थ और सकारात्मक जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।

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