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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सरस्वती पूजा वाले बयान पर भाजपा ने जताया आक्रोश, जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष संजीव सिन्हा ने कहा- सनातन संस्कृति पर हमला बर्दाश्त नहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बयान शर्मनाक

 

 

जमशेदपुर। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा सनातन परंपराओं और पूजा-पाठ को लेकर दिए गए विवादित बयान पर सियासी घमासान तेज हो गया है। इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष संजीव सिन्हा ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है। संजीव सिन्हा ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का ऐसा बयान दुर्भाग्यपूर्ण है और करोड़ों हिंदुओं की आस्था, संस्कृति और परंपराओं का खुला अपमान है। उन्होंने कहा कि सरस्वती पूजा, लक्ष्मी पूजा, विश्वकर्मा पूजा और रामनवमी जैसे पवित्र त्योहारों पर सवाल उठाना मुख्यमंत्री के अहंकार और उनकी विकृत सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह बयान किसी मुख्यमंत्री का नहीं है। यह सत्ता के मद में चूर एक ऐसे व्यक्ति की सोच है, जो वोट बैंक के तुष्टिकरण में अपनी ही संस्कृति और जड़ों का सम्मान करना भूल चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री अन्य धर्मों के प्रति भी इसी तरह की टिप्पणी करने का साहस दिखा सकते हैं।

 

संजीव सिन्हा ने कहा कि यह वही भारत है जहां आर्यभट्ट, चाणक्य और सुष्रुत जैसे महान विद्वानों ने जन्म लेकर पूरी दुनिया को ज्ञान, विज्ञान और चिकित्सा की दिशा दिखाई।

उन्होंने कहा कि आज का भारत विश्व मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहा है। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, यूट्यूब, एडोब और आईबीएम जैसी कई वैश्विक कंपनियों में भारतीय मूल के लोग शीर्ष नेतृत्व की भूमिका में हैं और पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा पूजा हमारे श्रम, कौशल और सृजन का प्रतीक है, जबकि सरस्वती पूजा ज्ञान और विद्या की आराधना है। इन परंपराओं का मज़ाक उड़ाना अज्ञानता को दर्शाता है और यह भारत की समृद्ध विरासत का सीधा अपमान है।

 

संजीव सिन्हा ने मुख्यमंत्री को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे पहले राज्य की शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और विकास पर ध्यान दें, बजाय इसके कि लोगों की आस्था पर अनर्गल बयानबाजी करें। पूजा-पाठ पद्धति को नीचा दिखाकर कोई भी समाज या राज्य आगे नहीं बढ़ सकता। अंत में उन्होंने सभी पूजा समितियों और समाज के जागरूक लोगों से अपील की कि ऐसे मानसिकता वाले नेताओं और उनके दलों का सार्वजनिक रूप से बहिष्कार करें, जिससे कि भविष्य में कोई भी जनप्रतिनिधि सनातन आस्था के खिलाफ इस प्रकार की गैरजिम्मेदाराना टिप्पणी करने से पहले सौ बार सोचे।

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