कदमडीहा गांव में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सरहुल पर्व धूमधाम से संपन्न

ग्राम प्रधान सह नाया नित्यानंद महतो ने बताया कि सरहुल झारखंड राज्य का एक प्रमुख वसंतोत्सव है, जो नववर्ष के आगमन का प्रतीक होने के साथ-साथ प्रकृति के प्रति आस्था और श्रद्धा को दर्शाता है। यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से प्रारंभ होकर चैत्र पूर्णिमा तक तीन दिनों तक मनाया जाता है।


परंपरा के अनुसार, पूजा से एक दिन पूर्व नाया (पुजारी) उपवास रखकर ग्राम देवता (गोराम देवता) का आह्वान करते हैं, वहीं गांव के गड़ाईत एवं मनसा मुखी घर-घर जाकर सरहुल पूजा का निमंत्रण देते हैं। पर्व के दौरान नाया द्वारा सूर्य, ग्राम देवता एवं पूर्वजों की आराधना जाहिर थान में की जाती है, जहां साल के फूल, फल, सिंदूर, अरवा चावल अर्पित किए जाते हैं तथा पारंपरिक रूप से मुर्गा की बलि भी चढ़ाई जाती है।

अनुष्ठान के उपरांत ग्रामीण साल के फूल हाथ में लेकर पारंपरिक सरहुल नृत्य करते हुए नाया को गांव के प्रत्येक घर तक ले जाते हैं। इस दौरान घर की महिलाएं नाया के चरणों को हल्दी एवं सरसों के तेल से पखारती हैं। तत्पश्चात नाया घर-घर जाकर साल का फूल दरवाजे पर स्थापित करते हैं, जिससे घर में सुख-शांति, अच्छी वर्षा एवं समृद्ध फसल की कामना की जाती है।
इस पावन अवसर पर ग्राम प्रधान नित्यानंद महतो सहित मनसुख महतो, नंदलाल महतो, भीम महतो, बांका महतो, मुकेश महतो, शैलेश महतो, दीपक महतो, बलदेव महतो, मिहिर महतो, दारा महतो, अरविंद महतो, मनोज महतो, गोमहा महतो, माघुराम महतो, कार्तिक महतो, ठाकुरा महतो, बबलू महतो, शामलाल महतो, मनसा मुखी, रामु मुखी, भालु मुखी, दुखु दास, पवन दास, अरुण महतो, शुभम महतो, प्रदीप महतो, अजय महतो, संदीप महतो, सानो महतो, दिलीप महतो, कालीचरण महतो, बहादुर महतो, चंडी महतो, सुबोध चंद्र महतो सहित गांव के अनेक गणमान्य लोग जाहिर थान में उपस्थित रहे।

