चांडिल में छऊ नृत्य सम्मेलन का भव्य आयोजन, कलाकारों ने उठाई पेंशन व सुविधाओं की मांग

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि छऊ नृत्य हमारी माटी की पहचान है और इसे संरक्षित व संवर्धित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कलाकारों के योगदान को सराहनीय बताते हुए उनके सम्मान पर जोर दिया।


30 से अधिक दलों की भव्य प्रस्तुति
इस सम्मेलन में चांडिल, ईचागढ़ एवं आसपास के क्षेत्रों से लगभग 30 से अधिक छऊ नृत्य दलों ने भाग लिया। कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा, मुखौटे एवं वाद्य यंत्रों के साथ मनमोहक प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कलाकारों ने रखी प्रमुख मांगें
कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने अपनी आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की और एक मांग पत्र भी सौंपा। प्रमुख मांगों में शामिल हैं—
वृद्ध एवं असहाय कलाकारों के लिए मासिक पेंशन की व्यवस्था
पंजीकृत छऊ दलों को वार्षिक प्रोत्साहन राशि
जिले में छऊ कला केंद्र एवं प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना
उपेक्षा पर जताया रोष
कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने अपनी उपेक्षा को लेकर नाराजगी भी जताई। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने के बावजूद स्थानीय स्तर पर उन्हें न तो पर्याप्त मानदेय मिलता है और न ही बुनियादी सुविधाएं।

वहीं जिला परिषद उपाध्यक्ष ने आश्वासन दिया कि कलाकारों की मांगों को जिला परिषद की बैठक में उठाया जाएगा तथा सरकार तक मजबूती से पहुंचाया जाएगा।

