Wednesday, April 29, 2026
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सरायकेला में निजी स्कूलों पर सख्ती: फीस बढ़ोतरी 10% तक सीमित, नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई

सरायकेला-खरसावां:

जिले में निजी विद्यालयों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। मंगलवार को समाहरणालय सभागार में उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति की पहली बैठक आयोजित हुई, जिसमें फीस नियंत्रण, पारदर्शिता और छात्र सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक में तय किया गया कि अब कोई भी निजी विद्यालय अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकेगा। इससे अधिक बढ़ोतरी के लिए जिला समिति की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि एक बार फीस में वृद्धि के बाद कम से कम दो वर्षों तक दोबारा बढ़ोतरी नहीं की जा सकेगी।

प्रशासन ने सभी निजी विद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे पिछले तीन शैक्षणिक सत्रों तथा सत्र 2026-27 की कक्षावार फीस का पूरा विवरण एक सप्ताह के भीतर समिति को उपलब्ध कराएं। बिना अनुमति अतिरिक्त या छिपी हुई फीस वसूली पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

अभिभावकों को राहत देते हुए यह भी कहा गया कि किसी भी विद्यालय द्वारा किताब, कॉपी या यूनिफॉर्म के लिए किसी विशेष दुकान से खरीदारी के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। प्रवेश या पुनः नामांकन के नाम पर किसी प्रकार की अवैध वसूली पर भी पूरी तरह रोक रहेगी।

बैठक में प्रत्येक निजी विद्यालय में शुल्क समिति और अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) का गठन अनिवार्य किया गया है। इन समितियों की जानकारी विद्यालय की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करनी होगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। स्कूल वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। सभी विद्यालयों को परिवहन और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा ‘राइट टू एजुकेशन’ के तहत पात्र बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन ने दोहराया कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अभिभावकों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। अब देखना होगा कि निजी विद्यालय इन निर्देशों का पालन किस स्तर तक करते हैं।

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