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गम्हरिया ब्लॉक परिसर बना शराबियों का अड्डा, CO से धक्का-मुक्की के बाद मचा हड़कंप

सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र स्थित गम्हरिया ब्लॉक परिसर में शनिवार को प्रशासनिक व्यवस्था की धज्जियां उड़ती नजर आईं। सरकारी कार्यालय परिसर में क्रेटा कार खड़ी कर खुलेआम शराब पार्टी कर रहे युवकों ने हद तब पार कर दी जब रोकने पहुंचे गम्हरिया के अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार और सुरक्षा कर्मियों से ही बदसलूकी व धक्का-मुक्की शुरू कर दी। घटना के बाद पूरे ब्लॉक परिसर में अफरा-तफरी मच गई।

 

जानकारी के अनुसार गम्हरिया ब्लॉक परिसर में क्रेटा कार संख्या JH05CL0955 एवं मोटरसाइकिल संख्या JH05DJ1832 लगाकर चार युवक शराब का सेवन कर रहे थे। उसी दौरान अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार लैंप्स कार्यालय के निरीक्षण पर पहुंचे थे। निरीक्षण के क्रम में उनकी नजर ब्लॉक परिसर में खड़ी कार और वहां मौजूद युवकों पर पड़ी।

 

सीओ ने जब युवकों को सरकारी परिसर में शराब पीने से रोका और पूछताछ करनी चाही, तब सभी युवक नशे की हालत में उल्टा अंचल अधिकारी और सुरक्षा कर्मियों से उलझ पड़े। आरोप है कि युवकों ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया और धक्का-मुक्की भी की।

 

स्थिति बिगड़ते देख सुरक्षा कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए एक युवक को दौड़ाकर पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। गिरफ्तार युवक की पहचान कल्याण कुमार प्रधान के रूप में हुई है। वहीं बाकी तीन युवक मौके से फरार होने में सफल रहे।

 

मामले को लेकर आदित्यपुर थाना प्रभारी विनोद तिर्की से दूरभाष पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

 

सूत्रों के मुताबिक गम्हरिया ब्लॉक परिसर स्थित एक सरकारी भवन पर लंबे समय से अवैध कब्जा किया गया है। चर्चा है कि उक्त भवन पर कब्जा जमाए लोगों द्वारा ही युवकों को बुलाकर शराब पार्टी कराई जा रही थी। घटना के बाद गिरफ्तार युवक को छुड़ाने के लिए कुछ सफेदपोश लोगों की थाना में सक्रियता भी बढ़ने लगी है।

इस घटना ने सरकारी परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर प्रशासन गरीबों और छोटे दुकानदारों पर अतिक्रमण हटाने के नाम पर बुलडोजर कार्रवाई करता है, वहीं दूसरी ओर रसूखदारों द्वारा सरकारी संपत्तियों पर कब्जा और सरकारी परिसर में खुलेआम शराबखोरी जैसे मामलों में कार्रवाई नहीं होना दोहरे मापदंड को दर्शाता है। अब लोगों की नजर जिला प्रशासन और उपायुक्त की कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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