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पोटका के बालीडीह गांव में चला फोकस लेप्रोसी कैम्पेन, 71 लोगों की जांच में नहीं मिला कोई कुष्ठ मरीज

जमशेदपुर। राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड स्थित बालीडीह गांव, बुरूहातु क्लस्टर में मंगलवार को फोकस लेप्रोसी कैम्पेन (एफएलसी) चलाया गया। सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल के निर्देश पर आयोजित इस अभियान का उद्देश्य कुष्ठ रोग की जल्द पहचान कर समय पर उपचार सुनिश्चित करना था।

 

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोटका की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रजनी महाकुड़ के नेतृत्व में गठित चिकित्सीय दल ने गांव में घर-घर जाकर लोगों की शारीरिक जांच की। अभियान के दौरान सहिया एवं एमपीडब्ल्यू कर्मियों ने ग्रामीणों की जांच कर संदेहास्पद कुष्ठ मरीजों की पहचान की प्रक्रिया पूरी की।

 

अभियान में कुल 71 लोगों की जांच की गई, जिनमें 21 संदेहास्पद मरीजों की स्क्रीनिंग की गई। हालांकि जांच के दौरान कोई भी नया कुष्ठ रोगी नहीं मिला।

 

कार्यक्रम में मौजूद जिला कुष्ठ परामर्शी डॉ. राजीव लोचन महतो ने कहा कि कुष्ठ रोग की जल्द पहचान और एमडीटी दवा से पूर्ण उपचार के जरिए दिव्यांगता को रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में जिले में अब तक 54 नए कुष्ठ रोगियों की पहचान हुई है, जिनमें पांच मरीज दिव्यांगता से प्रभावित हैं। वहीं चार मरीजों की रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी कर उनकी दिव्यांगता को दूर किया गया है।

 

डॉ. महतो ने कहा कि कुष्ठ रोग को समाप्त करने के लिए समाज को जागरूक होने की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से कुष्ठ रोगियों के प्रति भेदभाव न करने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की अपील की।

 

एमपीडब्ल्यू उपेंद्रनाथ मोदिना ने कहा कि नियमित रूप से एमडीटी दवा का सेवन करने से कुष्ठ रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से उपचार अवधि के दौरान मरीजों को प्रतिमाह 500 रुपये की सहायता राशि भी दी जा रही है।

 

इस अभियान को सफल बनाने में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रजनी महाकुड़, जिला कुष्ठ परामर्शी डॉ. राजीव लोचन महतो, एमपीडब्ल्यू उपेंद्रनाथ मोदिना सहित रसुनचोपा एवं बुरूहातु क्लस्टर की सहिया दीदियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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