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जमशेदपुर: बालीडीह गांव में चला डायन प्रथा जागरूकता अभियान, अंधविश्वास के खिलाफ लोगों को किया जागरूक

 

जमशेदपुर। सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल के निर्देश पर जिला स्वास्थ्य समिति, पूर्वी सिंहभूम द्वारा मंगलवार को पोटका प्रखंड के बालीडीह गांव में डायन प्रथा के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान में साहियाओं एवं ग्रामीणों को सामाजिक कुरीतियों और अंधविश्वास के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया गया।

 

कार्यक्रम के दौरान जिला कुष्ठ परामर्शी डॉ. राजीव लोचन महतो ने कहा कि डायन प्रथा एक गंभीर सामाजिक कलंक है, जो आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के उत्पीड़न का कारण बन रही है। उन्होंने बताया कि प्राचीन मान्यताओं और अंधविश्वासों के कारण महिलाओं, विशेष रूप से विधवाओं एवं अकेली महिलाओं को डायन बताकर प्रताड़ित किया जाता है। कई मामलों में संपत्ति विवाद, पारिवारिक झगड़े और व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण भी महिलाओं पर डायन होने का आरोप लगाया जाता है।

 

डॉ. महतो ने कहा कि समाज में ओझा-गुनी और तांत्रिकों की बातों पर विश्वास कर लोगों को डायन के रूप में चिन्हित किया जाता है, जिससे सामाजिक हिंसा को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने लोगों से वैज्ञानिक सोच अपनाने और अंधविश्वास से दूर रहने की अपील की।

 

एमपीडब्ल्यू उपेन्द्रनाथ मोदिना ने कहा कि डायन प्रथा को समाप्त करने में जागरूकता और शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि झारखंड सरकार ने वर्ष 2001 में “झारखंड डायन प्रथा निवारण अधिनियम” लागू किया है, जिसके तहत दोषियों के लिए कठोर सजा, आजीवन कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।

 

उन्होंने कहा कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में वैज्ञानिक सोच के अभाव तथा सीमित जागरूकता अभियानों के कारण यह कुरीति अब भी बनी हुई है। इसे खत्म करने के लिए सामाजिक सुधार और सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

 

अभियान के दौरान लोगों को डायन प्रथा से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने तथा महिलाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में सहिया-साथी, बुरूहातु एवं रसुनचोपा क्लस्टर की सहियाओं सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

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