हरिभंजा में 108 कलश जल से हुआ महाप्रभु का महास्नान, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ धार्मिक अनुष्ठान

खरसावां :- हरिभंजा स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में सोमवार को स्नान पूर्णिमा पर महाप्रभु का महास्नान कराया गया. सेवायतों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सेवायतों ने प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा व सुदर्शन की प्रतिमा को मंदिर के रत्न सिंहासन से स्नान मंडप तक पहुंचाया. स्नान मंडप पर हवन-पूजन कर सभी धार्मिक रश्मों को भक्ति भाव के साथ निभाया गया. इसके पश्चात जय जगन्नाथ के जयघोष, शंखध्वनी व उलुध्वनी के बीच महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा व सुदर्शन को 108 कलश जल से महास्नान कराया गया. वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महाप्रभु जगन्नाथ को 35 कलश, बडे भाई बलभद्र को 42 कलश, बहन सुभद्रा को 20 कलश व सुदर्शन को 11 कलश जल से स्नान कराया गया. इसके अलावे अगुरु, चंदन, गाय का घी, दुघ, दही, मधु, हल्दी आदि का लेप भी लगाया गया. महाप्रभु के महास्नान की अमृतबेला को देखने के लिये बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे. इस दौरान मुख्य रुप से पुरोहित प्रदीप कुमार दाश, भरत त्रिपाठी, जगन्नाथ त्रिपाठी समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे थे. प्राचीन धार्मिक परंपरा के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अत्यधिक स्नान करने के कारण बीमार हो जाता है. इस दौरान भगवान को मंदिर के एक अलग कमरे ‘अणवसर गृह’ में रखा जाता है, जहां उनका देशी जुड़ी-बुटी से उपचार किया जाता है. बीमारी के कारण महाप्रभु एक पखवाड़े तक किसी को दर्शन नहीं देते है. इसे ‘अनासर काल’ कहते हैं. 14 जुलाई को महाप्रभु पूरी तरह से स्वास्थ्य हो कर भक्तों को दर्शन देंगे. इसी दिन महाप्रभु का नेत्रोत्सव भी किया जायेगा. इसी दिन भगवान नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे. इसके तीसरे दिन 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकलेगी. भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा भव्य रथ पर सवार होकर मौसीबाड़ी (गुंडिचा मंदिर) के लिए प्रस्थान करेंगे. रथयात्रा महोत्सव को लेकर भी मंदिर समितियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं.



