Thursday, November 5, 2026
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राजनगर के भुईयानाचना (अशोकपुर) में 8 नवंबर की रात होगी मां श्मशान काली की पूजा, तांत्रिक पद्धति से होती है आराधना; 1999 से चली आ रही परंपरा

 

 

सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड अंतर्गत भुईयानाचना गांव के अशोकपुर में मां श्मशान काली की पूजा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। आगामी 8 नवंबर की रात यहां पारंपरिक विधि-विधान के साथ मां श्मशान काली की पूजा-अर्चना की जाएगी। खास बात यह है कि यहां मां काली की आराधना विशेष तांत्रिक पद्धति से की जाती है। वर्ष 1999 से लगातार आयोजित हो रही इस पूजा के प्रति क्षेत्र के लोगों में गहरी आस्था है।

 

स्थानीय मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं के अनुसार, अशोकपुर में आयोजित होने वाली मां श्मशान काली की पूजा का विशेष महत्व है। प्रत्येक वर्ष पूजा के अवसर पर सरायकेला-खरसावां समेत झारखंड के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्त मां के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मन्नत मांगते हैं। मान्यता है कि मां के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करते हैं।

 

पूजा के अवसर पर 8 नवंबर की संध्या कलश यात्रा भी निकाली जाएगी। इसमें स्थानीय ग्रामीणों, महिलाओं, पुरुषों और श्रद्धालुओं की भागीदारी रहेगी। कलश यात्रा के बाद रात में मां श्मशान काली की पूजा-अर्चना की जाएगी। इसे लेकर गांव में धार्मिक उत्साह का माहौल है और ग्रामीण आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

 

श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए पूजा स्थल के आसपास साफ-सफाई की व्यवस्था की गई है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था भी की जा रही है, ताकि पूजा के दौरान आवागमन सुचारू बना रहे और लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

 

आयोजन की तैयारियों में स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों की सक्रिय भूमिका देखने को मिल रही है। शिवा महतो, रोहित महतो, अजय महतो, भरत महतो, विश्वजीत महतो, तूफान सरदार, अमित सरदार और नयन महतो समेत कई ग्रामीण आपसी सहयोग से व्यवस्था संभाल रहे हैं।

 

आयोजकों और ग्रामीणों का प्रयास है कि वर्ष 1999 से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा का निर्वहन इस वर्ष भी श्रद्धा और उत्साह के साथ किया जाए। साथ ही, पूजा में शामिल होने के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सके।

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