कोल्हान में भाजपा की नई रणनीति! गौतम महतो को बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी? संघ और दिल्ली नेतृत्व की रणनीति की चर्चा

कोल्हान। झारखंड की राजनीति में 2029 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से सियासी बिसात बिछने लगी है। इसी बीच कोल्हान प्रमंडल को लेकर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संभावित रणनीति चर्चा में है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि कोल्हान में संगठन को मजबूत करने के लिए युवा नेता गौतम महतो को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने पर मंथन चल रहा है।


सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का झारखंड दौरा हुआ। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की राजनीतिक और संगठनात्मक स्थिति को लेकर कई गणमान्य लोगों से मुलाकात की। संगठन की कमजोरी, पिछले चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन और सत्ता से बाहर होने के कारणों को लेकर जमीनी फीडबैक लिए जाने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि इस दौरे से मिले फीडबैक को दिल्ली नेतृत्व तक पहुंचाया गया है।
इसी के बाद कोल्हान को लेकर भाजपा की संभावित रणनीति की चर्चा तेज हुई है। कोल्हान प्रमंडल की 14 विधानसभा सीटों पर संगठन को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले युवा चेहरों को आगे बढ़ाने की तैयारी की बात सामने आ रही है। इसी क्रम में गौतम महतो का नाम प्रमुखता से सामने आने की चर्चा है।
कौन हैं गौतम महतो?
गौतम महतो को कोल्हान क्षेत्र में एक युवा नेता और समाजसेवी के रूप में जाना जाता है। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में उनकी सक्रियता के साथ-साथ पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो से उनके पारिवारिक संबंध भी बताए जाते हैं। हालांकि, उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर अंतिम निर्णय और किसी औपचारिक जिम्मेदारी की घोषणा अभी सामने नहीं आई है।
कुड़मी समाज से जुड़े विभिन्न आंदोलनों और सामाजिक गतिविधियों में भी गौतम महतो की सक्रिय भूमिका की चर्चा होती रही है। रेल ठेका डहर छैका जैसे बड़े आंदोलनों को सफल बनाने में उनकी भूमिका रहने का दावा उनके समर्थकों और उनसे जुड़े लोगों की ओर से किया जाता रहा है।
खास बात यह भी बताई जा रही है कि गौतम महतो की सक्रियता सिर्फ सामाजिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रही है। सूत्रों के मुताबिक, वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। ऐसे में अगर यह जानकारी सही है, तो उनके पास एक तरफ कुड़मी समाज के बीच सामाजिक संपर्क और दूसरी तरफ संघ परिवार के साथ संगठनात्मक जुड़ाव का अनुभव होने की बात कही जा रही है।
यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि गौतम महतो को कोल्हान में भाजपा के लिए एक ऐसे युवा चेहरे के रूप में तैयार किया जा सकता है, जो सामाजिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर काम कर सके।
कुड़मी समाज के बिना झारखंड की राजनीति?
कोल्हान की राजनीति में सामाजिक समीकरणों को देखते हुए कुड़मी समाज की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में है। राजनीतिक गलियारों में एक बात तेजी से कही जा रही है कि कुड़मी समुदाय को नजरअंदाज कर झारखंड में किसी भी बड़े राजनीतिक समीकरण की राह आसान नहीं होगी। खासकर कोल्हान में कुड़मी समाज की मजबूत सामाजिक मौजूदगी को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए यह समुदाय महत्वपूर्ण माना जाता है।
ऐसे में गौतम महतो जैसे चेहरे को आगे बढ़ाने की संभावित रणनीति को सिर्फ संगठनात्मक बदलाव के तौर पर नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
हालांकि, भाजपा या संघ की ओर से गौतम महतो को लेकर किसी नई जिम्मेदारी अथवा 2029 के लिए किसी विशेष रणनीति की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। इसलिए सामने आ रही जानकारी को राजनीतिक सूत्रों और चर्चाओं के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।
लेकिन अगर सूत्रों की यह चर्चा आने वाले दिनों में सच साबित होती है, तो कोल्हान की राजनीति में गौतम महतो का कद तेजी से बढ़ सकता है और 2029 के चुनावी मुकाबले से पहले भाजपा के लिए कोल्हान में एक नया राजनीतिक चेहरा सामने आ सकता है।
अब सवाल यही है—क्या 2029 के चुनावी युद्ध के लिए भाजपा और संघ कोल्हान में गौतम महतो पर बड़ा दांव लगाने की तैयारी कर रहे हैं? इसका जवाब आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियों से मिल सकता है।

