अमायानगर सड़क हादसा: तेज रफ्तार कार ने उजाड़ दिया परिवार, 6 वर्षीय श्रेया की मौत; मां-पिता और भाई समेत 5 गंभीर

पुलिया की रेलिंग तोड़ नदी में गिरी बेकाबू कार, पांच घंटे बाद झाड़ियों में मिली जिंदगी और मौत से जूझती मां — जन्माष्टमी पर कान्हा बनने वाली थी मासूम श्रेया, अब तस्वीर पर चढ़ी माला


घाटशिला। अमायानगर में गुरुवार की रात तेज रफ्तार और कथित लापरवाही ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। रात करीब आठ बजे एक अनियंत्रित कार पुलिया की रेलिंग तोड़ते हुए नदी में जा गिरी। हादसे में किडजी स्कूल की छह वर्षीय छात्रा श्रेया सिन्हा की मौत हो गई, जबकि उसकी मां सुष्मिता सिन्हा, पिता और छोटे भाई समेत परिवार के पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों का इलाज जमशेदपुर स्थित टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) में चल रहा है। परिजनों के अनुसार, कई घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है।
बताया गया कि परिवार के सदस्य और बच्चे रात में नदी का पानी देखने के लिए घर से निकले थे। इसी दौरान एक तेज रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहन पुलिया की रेलिंग तोड़ते हुए नदी में जा गिरा। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत और बचाव का प्रयास शुरू किया। सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और अंधेरे तथा नदी के तेज बहाव के बीच रेस्क्यू अभियान चलाया गया।
हादसे में श्रेया की मां सुष्मिता सिन्हा नदी के तेज बहाव में बह गईं। करीब पांच घंटे तक उनका कोई पता नहीं चला। देर रात करीब एक बजे घटनास्थल से लगभग एक किलोमीटर दूर हरिंदुकरी क्षेत्र में नदी किनारे झाड़ियों और पेड़ की डाल के सहारे उन्हें जिंदगी और मौत के बीच जूझते हुए पाया गया। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से उन्हें बाहर निकाला गया और तत्काल अस्पताल भेजा गया।
इधर, हादसे में गंभीर रूप से घायल श्रेया को इलाज के लिए अस्पताल ले जाने में भी परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, खून से लथपथ बच्ची को अस्पताल में तत्काल बेहतर आपातकालीन मदद की जरूरत थी। इसी दौरान ‘जमीनी आवाज’ से जुड़े रिंकू सिंह ने मदद के लिए आगे आते हुए अपनी निजी गाड़ी से बच्ची को टीएमएच जमशेदपुर पहुंचाया। बताया गया कि उन्होंने देर रात करीब 1:14 बजे बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया और ब्लड बैंक से तीन यूनिट खून की व्यवस्था भी कराई।
डॉक्टरों ने श्रेया को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण सुबह करीब 8:30 बजे उसने दम तोड़ दिया। मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिजनों और मदद के लिए आगे आए लोगों में मातम छा गया।
सबसे दर्दनाक बात यह है कि श्रेया जन्माष्टमी को लेकर बेहद उत्साहित थी। परिजनों के मुताबिक, वह स्कूल में होने वाले जन्माष्टमी कार्यक्रम में भगवान श्रीकृष्ण के रूप में सजने वाली थी। इसके लिए उसने नई पोशाक और जरूरी सामान भी खरीदे थे और परिवार के लोगों को बड़े उत्साह से दिखाया था। जिस बच्ची को जन्माष्टमी के मौके पर कान्हा के रूप में स्कूल में मुस्कुराना था, उसकी तस्वीर पर अब माला चढ़ गई है। श्रेया के निधन से उसके स्कूल के शिक्षक, सहपाठी और पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया है।
हादसे ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है। श्रेया के छोटे भाई के दोनों पैरों में गंभीर फ्रैक्चर बताया जा रहा है और उसका बड़ा ऑपरेशन होना है। वहीं पिता और मां सुष्मिता सिन्हा भी गंभीर रूप से घायल हैं और उनके ऑपरेशन चल रहे हैं। एक ही परिवार के कई सदस्यों के अस्पताल में भर्ती होने और मासूम बेटी को खोने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली और क्षेत्र में कथित अवैध नशे के कारोबार को लेकर भी आक्रोश है। स्थानीय निवासी आशीष राय ने पुलिस गश्ती और वाहन जांच व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि शाम के समय, जब सड़कों पर आवाजाही अधिक रहती है, प्रमुख स्थानों पर नियमित वाहन जांच की जरूरत है। उन्होंने गोपालपुर फाटक और उबी मोड़ बैंक के सामने पूर्व में हुए हादसों का हवाला देते हुए शाम के समय विशेष वाहन जांच अभियान चलाने की मांग की।
वहीं शिवाजी चटर्जी ने क्षेत्र में बढ़ते नशे के चलन को लेकर चिंता जताई। उनका आरोप है कि शराब और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन के बाद कुछ चालक तेज रफ्तार में वाहन चलाते हैं, जिससे सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने पुलिस से केवल वाहन चालकों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहने, बल्कि अवैध नशे के कारोबार और उसके सप्लायरों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
पुलिस ने हादसे में शामिल वाहन चालक को हिरासत में लिया है और मामले की जांच की जा रही है। स्थानीय लोगों ने निष्पक्ष जांच के साथ तेज रफ्तार पर नियंत्रण, संवेदनशील स्थानों पर ब्रेकर और बैरिकेडिंग, नियमित वाहन जांच तथा नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अमायानगर की यह घटना सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि एक परिवार के बिखर जाने की ऐसी त्रासदी है, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। सवाल अब यही है कि क्या हादसे के बाद होने वाली कार्रवाई भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोक पाएगी, या फिर सड़क पर तेज रफ्तार और लापरवाही का कहर यूं ही मासूम जिंदगियां निगलता रहेगा।

