डूब क्षेत्र के नाम पर विकास से वंचित हेरमा समेत कई गांव, ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश

राजनगर:आजादी के 75 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड अंतर्गत हेरमा पंचायत के हेरमा समेत पांच-छह गांव आज भी सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ईचा-खरकई डैम परियोजना के डूब क्षेत्र में शामिल होने के कारण वर्षों से इन गांवों में विकास कार्य ठप पड़े हैं। कई बार प्रशासन और सरकार के समक्ष समस्याएं उठाने के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।


ग्रामीणों के अनुसार ईचा-खरकई डैम परियोजना के तहत 126 गांवों को डूब क्षेत्र घोषित किया गया था। इनमें पश्चिम सिंहभूम जिले के कई गांवों में प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क निर्माण, हर घर नल-जल योजना, शौचालय निर्माण सहित अन्य विकास योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। वहीं राजनगर प्रखंड के हेरमा पंचायत के गांव अब भी बुनियादी सुविधाओं और सरकारी योजनाओं से वंचित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ही परियोजना के अंतर्गत आने वाले अन्य डूब क्षेत्र के गांवों में विकास कार्य जारी हैं, जबकि हेरमा समेत आसपास के गांवों में योजनाएं लागू नहीं की जा रही हैं। इससे लोगों में भेदभाव की भावना और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
हेरमा गांव के ग्राम प्रधान दासकन कुदादा ने बताया कि गांव के लोगों को आज तक प्रधानमंत्री आवास योजना सहित कई महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार और प्रशासन जल्द उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देता है तो ग्रामीण आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि स्थिति में सुधार नहीं होने पर वर्ष 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बहिष्कार पर भी विचार किया जा सकता है।
ग्रामीणों ने सरकार से पूरे मामले की समीक्षा कर सभी प्रभावित गांवों को समान रूप से जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास के अधिकार से किसी भी गांव को वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।
फिलहाल हेरमा समेत आसपास के गांवों के लोग बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों की आस लगाए सरकार एवं प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। अब देखना होगा कि उनकी मांगों पर संबंधित विभाग और प्रशासन क्या कदम उठाते हैं।

