टेल्को में पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाया गया करम परब, प्रकृति और भाई-बहन के प्रेम का दिया संदेश

जमशेदपुर: 22 सितंबर 2026, शुक्ल पक्ष भाद्र एकादशी के अवसर पर टेल्को घड़ी पार्क बस स्टैंड के समीप आखड़ा मैदान में देसुआ आदिबासि कुड़मि समाज, बिरसानगर-टेल्को करम आखड़ा की ओर से जनजातीय प्राकृतिक आस्था का महापरब करम परब श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाया गया।


कार्यक्रम के दौरान लाइआ प्रकाश महतो केटिआर द्वारा विधिवत करम सेंउरन आराधना कर पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। करम परब को नवसृजन, प्रकृति के प्रति आस्था और भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
करम परब की परंपरा के तहत पांच दिन पूर्व ‘जाउआ डाला’ उठाकर विशेष नेग-नीति का पालन करने वाली करमइति कुँआरी कन्याएं भी पूजा में विशेष रूप से शामिल हुईं। इनमें टिआसा महतो काड़ुआर, लक्ष्मी महतो छंचमुतरुआर, स्वीटी महतो छंचमुतरुआर, अनुप्रिया महतो टिड़ुआर और अनुप्रभा महतो टिड़ुआर शामिल रहीं।
इस अवसर पर देसुआ आदिबासि कुड़मि समाज के मुख्य संयोजक प्रसेनजीत महतो काछिमा ने कहा कि करम परब कुड़मि समाज की आदि विशिष्ट संस्कृति और परंपरा का परिचायक है। यह पर्व हमें प्रकृति की रक्षा और उसके सम्मान की सीख देता है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से महिलाओं और युवा वर्ग को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के लिए बढ़-चढ़कर भागीदारी निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बदलते परिवेश में जनजातीय कुड़मि समाज के अस्तित्व, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए अपनी भाषा, संस्कृति, धरम और परंपराओं को जानना, पहचानना और समझना जरूरी है। करम सहित समाज के बारह महीने के तेरहों पर्व कृषि और प्रकृति आधारित परंपराओं से जुड़े हुए हैं।
करम परब के आयोजन में लाइआ प्रकाश महतो केटिआर, समाजसेवी प्रणव महतो, नरु महतो, पवन महतो, उदित महतो, सुजीत महतो, संजय महतो, निर्मल महतो, मंटू महतो, संटु महतो, सूरज महतो, नीरानंद महतो, महादेव महतो, अंगद महतो, खंकु महतो, नमिता महतो, रानी महतो, गीता महतो, मनिला महतो, पूर्णिमा महतो, टिआसा महतो, अनुप्रिया महतो, अनुप्रभा महतो, हर्षिता महतो, सोनामनी महतो और निछु महतो सहित समाज के कई लोग मौजूद रहे।
आयोजन के दौरान पारंपरिक पूजा-पद्धति और रीति-रिवाजों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और प्रकृति से जुड़े पर्व-त्योहारों की जानकारी देने का संदेश भी दिया गया।


