“राजनगर सीएचसी में जच्चा और बच्चा की दर्दनाक मौत… और अब इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत को कटघरे में खड़ा कर दिया है…
इस मुद्दे पर स्थानीय समाजसेवी मोतीलाल गौड़ ने बेहद कड़ी और सीधी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा—अगर अस्पताल में सोलर सिस्टम और जनरेटर जैसी व्यवस्था मौजूद थी, तो आखिर अंधेरे में प्रसव क्यों कराया गया? ये सिर्फ एक चूक नहीं… बल्कि पूरी व्यवस्था की नाकामी है।
गौड़ ने प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और एसडीएम स्तर की जांच का स्वागत किया, लेकिन साफ चेतावनी दी—जांच सिर्फ कागजी कार्रवाई बनकर न रह जाए, बल्कि हर पहलू की गहराई से और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिले में लगातार इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे लोगों का भरोसा सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से उठता जा रहा है।
सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए मोतीलाल गौड़ ने कहा—कई डॉक्टर सरकारी अस्पताल में ड्यूटी के दौरान मौजूद ही नहीं रहते… बल्कि अपने निजी क्लिनिक में मरीज देखते हैं। इससे एक तरफ वे सरकार को भी चुना लगा रहे हैं… और दूसरी तरफ अस्पताल में इलाज के अभाव में गरीब मरीजों की जान जा रही है।
उन्होंने सवाल उठाया—जब डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं होंगे, जब जनरेटर होते हुए भी नहीं चलेगा, जब जिम्मेदार लोग अपनी जिम्मेदारी से भागेंगे… तो आखिर आम जनता कहां जाए?
गौड़ ने एसडीएम से मांग की है कि इस पूरे मामले में हर स्तर पर जांच हो—ड्यूटी चार्ट से लेकर मौके की वास्तविक स्थिति तक… और जो भी दोषी हो, चाहे वह डॉक्टर हो, नर्स हो या कोई अन्य कर्मचारी… उस पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने दो टूक कहा—अगर इस बार भी कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं… और सरकारी अस्पतालों पर से लोगों का भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
अब सवाल सीधा है—
क्या इस बार सिस्टम खुद को सुधारेगा…
या फिर हर बार की तरह, दो जिंदगियों की मौत भी फाइलों में दबकर रह जाएगी…”