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सरकारी विभाग में ही श्रम कानून की अनदेखी? वन विभाग के निर्माण कार्य में आदिवासी मजदूरों के शोषण का आरोप

 

 

सरायकेला: जिले के मुख्यालय से कुछ दूरी पर ओल्ड एज होम के समीप वन विभाग के नए कार्यालय एवं स्टाफ भवन का निर्माण कार्य जारी है। इस निर्माण कार्य को लेकर पहले भी गुणवत्ता पर सवाल उठ चुके हैं, वहीं अब मजदूरों को मिलने वाली मजदूरी को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं।

 

निर्माण स्थल पर कार्यरत कुछ महिला मजदूरों ने दावा किया कि उन्हें प्रतिदिन सिर्फ ₹300 मजदूरी दी जा रही है। यदि यह दावा सही है, तो यह राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wages) के प्रावधानों का उल्लंघन है।

 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सबसे गंभीर बात यह है कि यह निर्माण कार्य वन विभाग के अधिकारियों की देखरेख में कराया जा रहा है। ऐसे में यदि श्रम कानूनों का पालन नहीं हो रहा है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब सरकारी विभागों में ही श्रमिकों के अधिकारों की अनदेखी होगी, तो निजी संस्थानों से नियमों के पालन की अपेक्षा कैसे की जा सकती है।

 

स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकांश मजदूर आदिवासी समुदाय से हैं और उन्हें निर्धारित मजदूरी से कम भुगतान कर उनका आर्थिक शोषण किया जा रहा है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तथा सभी मजदूरों को नियमानुसार मजदूरी दिलाने की मांग की है।

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