“पोटका में अपुर पाठशाला का शुभारंभ: बंगला भाषा सीखने के लिए बच्चों में दिखा उत्साह”
इस अवसर पर समाजसेवी तापस चटर्जी ने कहा कि मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं है, इसलिए सभी को अपनी मातृभाषा सीखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड में अपुर पाठशाला का पहल काफी सकारात्मक है।



कार्यक्रम में तीन टोला के कुल 50 बच्चों ने बंगला सीखने के लिए नामांकन किया। गौरी कुंज और गाजुड़ संस्था की ओर से बच्चों को वर्ण परिचय और कलम तथा विकास चंद्र भकत की ओर से स्लेट दिया गया।
सप्ताह में एक दिन बच्चों को निःशुल्क बंगला भाषा की शिक्षा दी जाएगी। इस अवसर पर नित्यानंद गोस्वामी, विकास कुमार भकत, बलराम गोप के अलावा गांव के महिलाएं, अभिभावक और विभिन्न विद्यालय के छात्र-छात्राएं काफी संख्या में उपस्थित थे।

