बेंगलुरु से चंद्री पहुँचेगा राजेश महतो का पार्थिव शरीर, अमित महतो के सहयोग से संभव हुआ अंतिम सफर
पश्चिम सिंहभूम जिला अंतर्गत चक्रधरपुर प्रखंड के चंद्री (चैनपुर) पंचायत स्थित चंद्री गांव निवासी 24 वर्षीय राजेश महतो का निधन बेंगलुरु में इलाज के दौरान हो गया। वे वहां बिग वेल इंसेंस कंपनी में अगरबत्ती फैक्ट्री में मजदूरी कर अपने परिवार का सहारा बने हुए थे। पिछले कुछ दिनों से वे बुखार और तेज बदन दर्द से पीड़ित थे, जिनका पहले संत जॉन्स हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था। गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें राजा राजेश्वरी मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में रेफर किया गया, जहाँ 21 जुलाई को उनका देहांत हो गया।


अत्यंत गरीब परिवार से आने वाले स्वर्गीय राजेश महतो का पार्थिव शरीर आज 23 जुलाई को एयर इंडिया की फ्लाइट संख्या IX-2722 से बेंगलुरु से राँची एयरपोर्ट लाया जा रहा है। अंतिम यात्रा को संभव बनाने में युवा समाजसेवी व आजसू नेता अमित महतो का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने पीड़ित परिवार से संपर्क कर हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।
सरायकेला-खरसावां के आजसू नेता हरेलाल महतो ने अमित महतो के आग्रह पर राँची एयरपोर्ट से चंद्री गांव तक मुफ्त एम्बुलेंस सेवा की व्यवस्था की है। इस मानवीय पहल के लिए परिवार और गाँव के लोगों ने आभार जताया है। पार्थिव शरीर का पोस्टमार्टम हो चुका है और रिपोर्ट आगामी एक सप्ताह में मिलने की संभावना है।
राजेश महतो के असामयिक निधन से चंद्री गांव सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। परिवार के मुखिया परेश महतो खेती-बाड़ी पर निर्भर हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय है। इस बात को ध्यान में रखते हुए अमित महतो ने जिला प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने का आग्रह किया, जिस पर उपायुक्त द्वारा सकारात्मक आश्वासन दिया गया है।
राजेश महतो के इलाज के दौरान बेंगलुरु में राकेश, फुलेश्वर और बलराम सहित अन्य परिजनों ने लगातार साथ निभाया। साथ ही, स्थानीय पुलिस प्रशासन एवं मुथु कुमार के सहयोग के लिए भी अमित महतो ने आभार प्रकट किया है।
घटना की जानकारी अमित महतो ने पत्र के माध्यम से झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री सुदेश महतो को भी दी है। श्री सुदेश महतो ने परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया है। वहीं, राँची एयरपोर्ट पर पार्थिव शरीर के आगमन के समय व्यवस्था में सहयोग के लिए मुन्ना जी को अमित महतो ने पहले से ही धन्यवाद ज्ञापित किया है।
यह घटना न केवल एक परिवार की पीड़ा है, बल्कि राज्य के बाहर काम कर रहे हजारों प्रवासी मजदूरों की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों को भी सामने लाती है। इस कठिन समय में समाजसेवियों और स्थानीय प्रशासन की भूमिका उम्मीद की एक किरण बनकर सामने आई है।


