धूमधाम से मनाया गया प्राकृतिक का अनुठा संगम जिउतीया पूजा
ईचागढ़-सरायकेला-खरसावां जिला के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में रविवार को जिउतीया पूजा यानी जितुआ पूजा धूमधाम से मनाया गया। सुबह को गाजे बाजे के साथ लोग इंख डाली को अपने घरों में लाया और शाम को अपने आंगन में गाड़कर विधि विधान से पूजा अर्चना किया गया। मान्यता के अनुसार माता अपने बच्चों के लम्बी उम्र एवं रोग दुःख से बचाने के लिए निर्जला उपवास कर अंकुरित चना का भोग लगाकर जितुआ यानी सुर्य पूत्र जिमीतवाहन का पूजन करते हैं और अपने बच्चों को आशीष देकर अष्टमी छोड़ने के बाद दुसरे दिन पारन कर व्रत का समापन करती है। प्राकृतिक पूजा के रूप में करम पूजा के कुछ दिन बाद ही इंख डाली का पूजा करते हैं। जीता पूजा में श्रृगाल और गिध का भी पूजा किया जाता है,जो एक प्राकृतिक संरक्षण का संदेश देता है। पेड़ पौधे एवं वन्य जीव जन्तु का पूजा अर्चना से प्राकृतिक संरक्षण और संवर्धन के लिए पशु व पेड़ पौधे का अटूट संबंध को दर्शाता है। ईचागढ़, कुकड़ू, नीमडीह, चांडिल सहित पूरे झारखंड में अधिकांश घरों में जितुआ पूजा किया जाता है।




