पोटका हत्याकांड की दिल दहला देने वाली कहानी: नौ साल का प्यार, शक की आंच और दो जिंदगियों का दर्दनाक अंत
जमशेदपुर | पोटका थाना क्षेत्र से सनसनीखेज मामला
पोटका थाना से महज दो किलोमीटर की दूरी पर घटित एक दर्दनाक घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को, बल्कि झारखंड से सटे अन्य राज्यों के लोगों को भी झकझोर कर रख दिया है। यह मामला महिला चौकीदार ज्योतिका हेंब्रम की निर्मम हत्या और उसके बाद प्रेमी गणेश माझी द्वारा आत्महत्या से जुड़ा है। दोनों की प्रेम कहानी करीब नौ वर्षों पुरानी बताई जा रही है, लेकिन बीते छह महीनों में हालात ऐसे बदले कि यह रिश्ता खून और मौत में तब्दील हो गया।


एसएसपी की कार्रवाई को मिल रही सराहना
इस पूरे प्रकरण में पोटका थाना प्रभारी मनोज मुर्मू की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं। जांच के दौरान जब यह सामने आया कि घटनाक्रम में उनकी भूमिका संदिग्ध है, तो वरीय पुलिस अधीक्षक पीयूष पांडेय ने त्वरित कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया। बताया जा रहा है कि आत्महत्या से पूर्व गणेश माझी द्वारा बनाया गया एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें उसने पूरी घटना की पृष्ठभूमि का उल्लेख किया था। यही वीडियो जांच का अहम आधार बना।
स्कूल से शुरू हुई थी दोस्ती
स्थानीय लोगों के अनुसार गणेश माझी और ज्योतिका हेंब्रम वर्ष 2016 से कालिकापुर स्थित हाई स्कूल में साथ पढ़ते थे। उस समय यह विद्यालय उत्क्रमित विद्यालय था। दोनों की नजदीकियों की जानकारी आसपास के गांवों में भी लोगों को थी।
चौकीदार बनने तक साथ निभाया
ज्योतिका के चौकीदार बनने की प्रक्रिया में भी गणेश ने हर संभव सहयोग किया था। परीक्षा दिलाने से लेकर अन्य औपचारिकताओं में वह स्वयं बाइक से उसे ले जाया करता था। दोनों के बीच भरोसे और सहयोग का रिश्ता बताया जाता है।
नौकरी के बाद बदले हालात
करीब छह महीने पहले ज्योतिका की चौकीदार के पद पर नियुक्ति हुई और उसकी पहली पोस्टिंग पोटका थाना में की गई। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन इसी दौरान गणेश को कई बार थाना बुलाया गया। आरोप है कि इसी समय ज्योतिका ने गणेश से विवाह करने से इनकार कर दिया, जिससे उनके संबंधों में तनाव बढ़ गया।
अवैध संबंध की आशंका
बताया जा रहा है कि गणेश को इस बात की जानकारी मिल गई थी कि ज्योतिका और थाना प्रभारी मनोज मुर्मू के बीच नजदीकियां बढ़ रही हैं। इसी आशंका ने हालात को और बिगाड़ दिया। मानसिक दबाव और तनाव के बीच यह दर्दनाक घटना घटित हुई, जिसमें पहले ज्योतिका की हत्या हुई और बाद में गणेश ने आत्महत्या कर ली।
घटना के वक्त फोन कॉल का दावा
सूत्रों के मुताबिक, घटना के दौरान ज्योतिका ने थाना प्रभारी को फोन किया था और फोन पर शोर-शराबा व चीख-पुकार की आवाजें भी सुनाई दी थीं। बाद में जब थाना प्रभारी ने दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, तो कॉल रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद मोबाइल लोकेशन के आधार पर वे सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे।
पहले से थी पूरी जानकारी?
इस मामले में सवाल यह भी उठ रहा है कि थाना प्रभारी को बिना किसी आधिकारिक सूचना के यह कैसे पता चल गया कि हत्या गणेश ने की है और वह उसके मोबाइल लोकेशन की निगरानी क्यों कर रहे थे। बाद में जब गणेश का शव मिला, तो पुष्टि हुई कि उसने आत्महत्या कर ली है।
आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस मामले में सिर्फ निलंबन तक ही कार्रवाई सीमित रहेगी या आगे कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। आम लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि यदि किसी आम व्यक्ति का नाम इस मामले में सामने आया होता, तो शायद अब तक कड़ी कार्रवाई हो चुकी होती।


