Newsझारखण्ड

पेसा नियमावली में पंचायत राज थोपने का आरोप, विरोध की चेतावनी

 

 

चाईबासा(प्रकाश कुमार गुप्ता): झारखंड सरकार द्वारा पेसा नियमावली 2025 को पारित किए जाने पर ईचा खरकई बांध विरोधी संघ, कोल्हान के अध्यक्ष बीर सिंह बिरुली ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि झारखंड निर्माण के 25 वर्षों बाद पेसा नियमावली का पारित होना स्वागत योग्य है, लेकिन अभी इसे पूरी तरह बधाई योग्य नहीं माना जा सकता।

बीर सिंह बिरुली ने कहा कि यह देखना जरूरी है कि नई नियमावली से पेसा कानून 1996 का मूल उद्देश्य, यानी पारंपरिक ग्राम सभाओं को शासन की शक्ति और अधिकार देना, पूरा हो रहा है या नहीं। यदि पेसा नियमावली 2025 के माध्यम से आदिवासियों की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था पर पंचायत राज व्यवस्था थोपने की कोशिश की गई, तो इसका जोरदार विरोध किया जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड कैबिनेट ने संसदीय अधिनियम 1996 के अनुरूप नियमावली बनाने के बजाय झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 की त्रि-स्तरीय पंचायत राज व्यवस्था को ही लागू कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में झारखंड उच्च न्यायालय ने आदिवासी बुद्धिजीवी मंच की याचिका पर यह स्पष्ट किया था कि पंचायत राज अधिनियम 2001 को पेसा अधिनियम 1996 के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

बीर सिंह बिरुली ने कहा कि वर्तमान पेसा नियमावली संसदीय अधिनियम 1996 की धारा 3 और धारा 4 (m) के विपरीत है, जिसमें ग्राम सभा और पंचायत को विशेष अधिकार दिए गए हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि पेसा कानून के मूल स्वरूप के अनुसार ही नियमावली लागू की जाए।

Share this news

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *