टाटा लीज नवीकरण से पहले मुआवजा व विस्थापन प्रमाण पत्र की मांग
मूलवासी अधिकार मंच के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को सौंपे दस्तावेज


जमशेदपुर। जिले के विभिन्न क्षेत्रों के रैयत खतियानधारी एवं टाटा विस्थापितों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को झारखंड मूलवासी अधिकार मंच के बैनर तले उपायुक्त से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मंच के मुख्य संयोजक हरमोहन महतो ने किया। इस दौरान झारखंड सरकार के उप सचिव मिथिलेश कुमार नीरज द्वारा जारी पत्र के आलोक में आवश्यक कागजात एवं विस्थापित परिवारों की सूची उपायुक्त को सौंपी गई।
प्रतिनिधिमंडल ने टाटा लीज के नवीकरण से पूर्व जमशेदपुर के 18 मौजा अंतर्गत आने वाले आदिवासी व मूलवासी रैयतों की जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित करने, अवैध रूप से अधिग्रहित भूमि की क्षतिपूर्ति, उचित मुआवजा एवं विस्थापन प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की। साथ ही बलपूर्वक अधिग्रहित की गई जमीन की वापसी पर भी जोर दिया गया।
इस अवसर पर हरमोहन महतो ने आरोप लगाया कि वर्ष 1967 में तत्कालीन बिहार सरकार द्वारा रैयती एवं सरकारी भूमि के सर्वे की अनुमति दी गई थी, लेकिन सर्वे के दौरान नियमों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि कृषियोग्य भूमि, बंजर भूमि, रैयती भूमि, जलस्रोत तथा ग्रामसभा व स्वशासन व्यवस्था से जुड़ी जमीनों का अलग-अलग सर्वे होना था, पर ऐसा नहीं कर सीधे आदिवासी और मूलवासी रैयतों की जमीन टाटा कंपनी को हस्तांतरित कर दी गई, जो कानूनन गलत है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 1996 में नए खतियान के आधार पर रैयतों की जमीन टाटा कंपनी को देने की प्रक्रिया संदेहास्पद है। प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से मांग की कि 1908 एवं 1937 के मूल खतियान के आधार पर जांच कर वास्तविक रैयतों की पहचान की जाए और उन्हें विधिवत विस्थापित प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाए। ज्ञापन की प्रतिलिपि राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को भी भेजी गई है।
उपायुक्त को आवेदन सौंपने वालों में रामचंद्र महतो, वासुदेव गौड़, नगेन्द्र नाथ प्रधान, मलिंदर सिंह, उपेन्द्रनाथ पांडा, समतुल सिंह, राम सिंह, मिथिलेश गौड़, पहाड़ सिंह, राजेन भूमिज, रवि रजक, संजय रजक, अबोध सिंह, भरत गौड़, गौर हेंब्रम, कुजरी बोदरा, कमलाकांत गौड़, आशीष कुमार गौड़, सोनाराम मांझी, मीना महतो सहित कई विस्थापित शामिल थे।

