पश्चिमी सिंहभूम में हाथी का आतंक, तीन की मौत, दो महिलाएं घायल
चाईबासा(प्रकाश कुमार गुप्ता): गुरुवार देर शाम से रात तक मची दहशत, शुक्रवार शाम तक बना रहा भय का माहौल


पश्चिमी सिंहभूम जिले में नए साल की शुरुआत हाथी के आतंक के साथ हुई। जिले के टोंटो प्रखंड अंतर्गत बांडीझारी और बिरसिंहहातु गांव तथा सदर प्रखंड के रोरो ग्राम में गुरुवार शाम करीब 5 बजे से रात 11 बजे के बीच एक जंगली हाथी के हमले से तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं। इस घटना से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, एक जंगली हाथी अपने झुंड से बिछड़कर रिहायशी इलाकों में घुस आया। भोजन की तलाश में गांव में प्रवेश करते ही हाथी ने अलग–अलग स्थानों पर लोगों पर हमला कर दिया। टोंटो प्रखंड के बांडीझारी गांव निवासी 35 वर्षीय मंगल सिंह हेंब्रम की हाथी के हमले में मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद बिरसिंहहातु गांव के कुचुबासा टोली निवासी 55 वर्षीय उर्दूप बहंदा भी हाथी की चपेट में आ गए और उनकी जान चली गई। वहीं सदर प्रखंड के रोरो ग्राम निवासी 57 वर्षीय विष्णु सुंडी की भी हाथी के हमले में मौत हो गई।
इस दौरान बिरसिंहहातु गांव की दो महिलाएं मानी कुंटिया और सुखमति बहंदा गंभीर रूप से घायल हो गईं। दोनों को तत्काल सदर अस्पताल चाईबासा में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। बताया गया है कि सुखमति बहंदा मृतक उर्दूप बहंदा की पत्नी हैं। घटना के बाद गांवों में अफरा–तफरी मच गई और लोग रात भर दहशत में रहे।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हाथी को जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास शुरू किया। वन विभाग के अधिकारी लगातार हाथी की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि खबर लिखे जाने तक, शुक्रवार शाम 5:30 बजे तक यह सूचना मिली कि हाथी दोबारा बिरसिंहहातु गांव की ओर लौट आया है, जिससे ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथी ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है और अत्यधिक आक्रामक व्यवहार कर रहा है। लोगों ने प्रशासन से हाथी को सुरक्षित तरीके से जंगल में भेजने, गांवों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने तथा मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। यह घटना एक बार फिर पश्चिमी सिंहभूम जिले में हाथी–मानव संघर्ष की गंभीर समस्या को उजागर करती है।

