पश्चिमी सिंहभूम में पागल हाथी का आतंक, 17 लोगों की मौत, जिला प्रशासन पर उठे सवाल
चाईबासा(प्रकाश कुमार गुप्ता): पश्चिमी सिंहभूम जिले में एक पागल दंतैल हाथी के आतंक से हालात बेहद भयावह बने हुए हैं। 1 जनवरी 2026 से 7 जनवरी 2026 के बीच हाथी के हमले में जिले के अलग-अलग प्रखंडों में अब तक 17 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। यह सिलसिला टोंटो प्रखंड के बंडीजारी गांव से शुरू हुआ, जो बाद में गोईलकेरा, नोवामुंडी और जगन्नाथपुर प्रखंड के कई गांवों तक फैल गया।


ग्रामीणों के अनुसार हाथी ने अधिकतर घटनाओं को रात के समय अंजाम दिया। वह घरों में घुसकर लोगों को कुचल देता था। इस दौरान दो परिवारों के सभी सदस्यों की मौत हो गई। लगातार हो रही मौतों से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और लोग भय के साए में जीवन जीने को मजबूर हैं।
खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच, पश्चिमी सिंहभूम ने इस गंभीर स्थिति पर जिला प्रशासन की उदासीनता पर चिंता जताई है।
मंच का कहना है कि हाथी को नियंत्रित करने के लिए किए जा रहे प्रयास केवल औपचारिकता तक सीमित हैं, जिसके कारण रोजाना जानमाल का नुकसान हो रहा है। प्रभावित परिवारों को क्रिया-कर्म के लिए मात्र 10 से 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जो पर्याप्त नहीं है।
इसी को लेकर मंच के सदस्यों ने 08 जनवरी 2026 को जिला उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में मांग की गई कि पागल हाथी को जल्द से जल्द नियंत्रित कर सुरक्षित स्थान पर भेजा जाए। मृतक परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। जिन किसानों की फसलें और पशु हाथी के हमले में नष्ट हुए हैं, उन्हें भी तत्काल मुआवजा मिले। साथ ही क्रिया-कर्म की राशि बढ़ाने और सभी मृतक परिवारों को आवास व शौचालय की सुविधा देने की मांग की गई।
उपायुक्त ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि हाथी को नियंत्रित करने के लिए टीम काम कर रही है, लेकिन अभी उसका पता नहीं चल पा रहा है। मंच के सदस्यों ने इस जवाब को संतोषजनक नहीं माना।
ज्ञापन सौंपने वालों में जितेंद्र मेलगांडी, समाजसेवी रमेश बालमुचु, रेयांस सामद, महेंद्र जामुदा, सचिन बालमुचू और मानकी तुबिड प्रमुख रूप से शामिल थे। मंच ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मानवीय संकट पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि आगे किसी और परिवार को इस तरह का दुख न झेलना पड़े।

