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पश्चिम सिंहभूम में हाथी आतंक बेकाबू, ग्रामीणों में दहशत 

 

 

विभागीय दावों के विपरीत जमीनी हकीकत भयावह

 

चाईबासा(प्रकाश कुमार गुप्ता): पश्चिम सिंहभूम जिले के सुदूर जंगल और पहाड़ी इलाकों में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। जंगल से सटे गांवों में हाथियों की नियमित आवाजाही से फसलों को भारी नुकसान हो रहा है, कई घर क्षतिग्रस्त हुए हैं और जानमाल का खतरा लगातार बना हुआ है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और लोग रात के समय घर से बाहर निकलने से डर रहे हैं। इस स्थिति में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग खुद को सबसे अधिक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

 

प्रभावित इलाकों से मिल रही सूचनाओं के अनुसार कई स्थानों पर सिंगल हाथी गांवों और खेतों में घुसकर फसलें नष्ट कर रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में आवागमन भी बाधित हो गया है, जिससे किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों से सटे गांवों में जनजीवन धीरे-धीरे ठप होता जा रहा है।

 

वन विभाग द्वारा हाथी नियंत्रण को लेकर किए जा रहे दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति अब भी बेकाबू बनी हुई है। न तो प्रभावी अलर्ट सिस्टम दिखाई दे रहा है और न ही पर्याप्त गश्ती दल सक्रिय हैं। पीड़ित परिवारों को समय पर मुआवजा और सुरक्षा व्यवस्था नहीं मिलने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

 

इस संबंध में गोप, गौड़ आरक्षण आंदोलन समिति के केंद्रीय अध्यक्ष धी रामहरि पेरियार ने चिंता जताते हुए कहा कि पश्चिम सिंहभूम में हाथियों का बढ़ता आतंक अब केवल वन्यजीव समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गंभीर मानवीय संकट का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन जीने को मजबूर हैं, जबकि प्रशासन और वन विभाग के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कागजी योजनाओं से नहीं, बल्कि ठोस और स्थायी कार्रवाई से ही लोगों की जान बचाई जा सकती है।

 

रामहरि पेरियार ने आम जनता से अपील की कि वे अत्यंत सतर्क रहें, किसी भी स्थिति में हाथियों को न उकसाएं, उनके रास्ते में न जाएं और रात के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें। उन्होंने बच्चों और बुजुर्गों की विशेष सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासन या वन विभाग को सूचना दें। उन्होंने कहा कि मानव जीवन बेहद कीमती है।

 

साथ ही उन्होंने प्रशासन और वन विभाग से मांग की कि हाथी प्रभावित गांवों में 24×7 निगरानी व्यवस्था लागू की जाए, त्वरित चेतावनी (अलर्ट) सिस्टम को प्रभावी बनाया जाए, हाथियों के सुरक्षित कॉरिडोर चिन्हित कर अतिक्रमण हटाया जाए, अतिरिक्त गश्ती दल तैनात किए जाएं और पीड़ित परिवारों को शीघ्र व पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।

 

अंत में रामहरि पेरियार ने कहा कि मानव जीवन सर्वोपरि है। जब तक ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती और जमीनी स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक इस मुद्दे पर आवाज उठती रहेगी और प्रशासन को इसकी पूरी जवाबदेही लेनी होगी।

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